ट्रंप के दौरे में व्यापार संधि नही

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा से ठीक पहले अमेरिका ने कई मसलों पर बड़ा बयान दिया है। अमेरिका ने यह संकेत दिया है कि इस दौरे में दोनों देशों के बीच व्यापार संधि होने की संभावना कम है। अमेरिका ने साथ पाकिस्तान को नसीहत देते हुए यह भी कहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद पर लगाम लगाए तभी भारत उसके साथ बात कर सकता है। गौरतलब है कि भारत हमेशा यहीं कहता रहा है कि जब तक सीमा पार से चलने वाला आतंकवाद बंद नहीं होता है तब तक बातचीत नहीं हो सकती है। ध्यान रहे अमेरिका के राष्ट्रपति इससे पहले कई बार मध्यस्थता की बात कर चुके हैं पर उनकी यात्रा से पहले अमेरिका का यह बयान भारत के लिहाज से अच्छा है।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप 24 फरवरी को भारत के दो दिन के दौरे पर पहुंच रहे हैं। इससे पहले अमेरिका ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान कोई बड़ा दोपक्षीय व्यापार समझौता होने की संभावना कम है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि भारतीय उत्पादों को अमेरिका में पहले जो वरीयता मिलती थी और शुल्क से छूट मिलती थी, उसे बंद कर दिया गया है और उसे बंद करने का कारण अब भी बना हुआ है।

अमेरिका की सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कांफ्रेंस कांफ्रेंस में संवाददाताओं से कहा- भारत को व्यापार में वरीयता की सामान्य प्रणाली, जीएसपी की सुविधा बंद करने या निलंबित करने के पीछे जो चिंताएं थीं, हमारे लिए वे चिंताएं आज भी बनी हुई हैं। अधिकारी ने कहा कि वास्तव में भारत सरकार अमेरिकी निर्यातकों के लिए बाजार में न्यायोचित व तार्किक प्रवेश सुविधा देने में विफल रही है।

बहरहाल, चर्चा है कि दोनों पक्षों के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता किए जाने से पहले दोनों पक्षों के बीच किसी व्यापार पैकेज पर सहमति हो सकती है। असल में भारत के साथ व्यापार सझौता वार्ता का नेतृत्व अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राबर्ट लाइटहाइजर कर रहे हैं। वे ट्रंप की इस यात्रा में भारत नहीं जा रहे हैं। वे पहले भी भारत की अपनी यात्रा रद्द कर चके हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार संधि के लिए वार्ता जारी रहेगी।

अमेरिकी अधिकारियों को भारत के मेक इन इंडिया कार्यक्रम को भी लेकर शिकायत है। वे इसे संरक्षणवादी बताते हैं। इस अधिकारी ने कहा- मेक इन इंडिया को लेकर मोदी सरकार ज्यादा सतर्क है। इसकी वजह से व्यापार संधि में दिक्कत आ रही है। अमेरिका को लगता है कि भारत सरकार मेक इन इंडिया को लेकर ज्यादा सख्त रुख अपना रही है। गौरतलब है कि सौदे पर दोनों देशों के अधिकारी करीब 18 दौर की बातचीत कर चुके हैं लेकिन फैसला नहीं हो पाया।

कही धार्मिक स्वतंत्रता पर न बोले

भारत के दौरे पर आ रहे अमेरिकी राष्ट्रपति भारत में धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा उठा सकते हैं। गौरतलब है कि अमेरिका के मानवाधिकार संगठन और कई समितियों ने कश्मीर सहित देश के दूसरे हिस्सों की कुछ घटनाओं का जिक्र करके पहले भी धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्द उठाया है।

ट्रंप की यात्रा से पहले एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा- ट्रंप और मोदी की बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति भारत में धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा भी उठा सकते हैं। संशोधित नागरिकता कानून, सीएए के बारे में पूछे जाने पर नाम नहीं बताने की शर्त पर इस अधिकारी ने कहा- ट्रंप दोनों देशों में लोकतंत्र और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर पहले भी अपना नजरिया सार्वजनिक और निजी तौर पर साफ करते रहे हैं।

कांग्रेस ने उठाया खर्च का मुद्दा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्वागत में अहमदाबाद में हो रहे कार्यक्रम पर होने वाले खर्च का मुद्दा कांग्रेस ने उठाया है। कांग्रेस ने पूछा है कि इसका खर्च कौन चुका रहा है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा है कि सरकार इसमें कुछ छिपा रही है। उन्होंने यह भी कहा है कि सरकार बताए कि कौन सा मंत्रालय इसमें कितने पैसे दे रहा है। गौरतलब है इस कार्यक्रम पर एक सौ करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।

पिछले दिनों जब खर्च को लेकर विवाद हुआ तो आनन-फानन में एक नागरिक अभिनंदन समिति बनाई गई। बताया जा रहा है कि इस समिति के सदस्यों को भी शुक्रवार को ही पता चला कि ऐसी कोई समिति बनी है। इस समिति की कोई वेबसाइट और ट्विटर हैंडल तक नहीं है। तभी इसके खर्च को लेकर सवाल उठ रहे हैं। माना जा रहा है कि समिति के नाम पर सरकार ही खर्च कर रही है।

बहरहाल, एक अखबार में छपे खबर के हवाले से प्रियंका गांधी वाड्रा ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा है- राष्ट्रपति ट्रंप के आगमन पर एक सौ करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। लेकिन ये पैसा एक समिति के जरिए खर्च हो रहा है। समिति के सदस्यों को पता ही नहीं कि वो उसके सदस्य हैं। क्या देश को ये जानने का हक नहीं कि किस मंत्रालय ने समिति को कितना पैसा दिया? समिति की आड़ में सरकार क्या छिपा रही है?

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