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महाराष्ट्र में जारी सियासी नाटक

मुंबई। महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच चल रही बातचीत अभी ऐसा लग रहा है कि अंतिम मुकाम तक नहीं पहुंच पाया है। सरकार बनाने के लिए जल्दी दावा करने के बावजूद शनिवार को तीनों पार्टियों के नेता राज्यपाल से नहीं मिले। एनसीपी की ओर से बताया गया था कि शनिवार को उन्होंने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलने का समय मांगा है पर शनिवार को यह मुलाकात नहीं हुई। इस बीच एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने कहा है कि सरकार बनाने में थोड़ी देरी हो सकती है।

गौरतलब है कि गुरुवार और शुक्रवार दो दिन तीनों पार्टियों के नेताओं की बैठक हुई और मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री पद से लेकर मंत्री पद के बंटवारे और साझा न्यूनतम कार्यक्रम पर सहमति बन गई। लेकिन पूरा मामला 17 या 18 नवंबर को दिल्ली में शरद पवार और सोनिया गांधी के बीच होने वाली मुलाकात तक के लिए टल गया है। इस बीच खबर आई है कि 22 नवंबर को होने वाले निकाय चुनावों में शिव सेना और कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन अलग अलग लड़ेंगे।

एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने शनिवार को कहा कि निकाय चुनाव के लिए शिव सेना से गठबंधन की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा- हम राज्य में सरकार बनाने के लिए शिव सेना से बात कर रहे हैं। निकाय चुनाव के लिए शिव सेना से गठबंधन का कोई प्रस्ताव नहीं है। 22 नवंबर को राज्य के 27 निकायों में होने वाले मेयर के चुनाव में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन अपने उम्मीदवार उतारेगा। इससे पहले एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने नागपुर में दोहराया कि सरकार बनाने में अभी थोड़ा और वक्त लगेगा।

महाराष्ट्र में भाजपा और शिव सेना गठबंधन टूट जाने और निकाय चुनावों में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के शिव सेना के साथ तालमेल नहीं करने का असर 22 नवंबर को होने वाले निकाय चुनावों पर पड़ेगा। खास कर मुंबई मेयर के लिए होने वाले चुनाव पर भी इसका असर पड़ सकता है। बृहन्नमुंबई नगर निगम, बीएमसी के 2017 में हुए चुनावों में 227 सदस्यों में शिव सेना के 84 पार्षद जीते थे, वहीं सहयोगी भाजपा के 82 पार्षदों ने जीत हासिल की थी। एमएनएस के छह और कुछ दूसरी पार्टियों के पार्षदों के टूट कर शिव सेना में शामिल हो जाने से उसके पार्षदों की संख्या 94 हो गई है।

तब भाजपा ने शिव सेना को समर्थन दिया था और विश्वनाथ महादेश्वर को मेयर चुना गया था। महादेश्वर का ढाई साल का कार्यकाल इस साल सितंबर में समाप्त हो गया लेकिन 21 अक्टूबर को हुए विधानसभा चुनावों को देखते हुए उनका कार्यकाल नवंबर तक बढ़ा दिया गया था। अब 22 नवंबर को इसके लिए चुनाव होगा। हो सकता है कि कांग्रेस के 28 और एनसीपी के नौ पार्षदों का समर्थन उसे मिले।

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