शाहीन बागः सड़क खुली व बंद हुई

नई दिल्ली। संशोधित नागरिकता कानून, सीएए के खिलाफ शाहीन बाग में सड़क पर धरने पर बैठे लोगों को मनाने और सड़क खुलवाने में सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त वार्ताकारों को कामयाबी नहीं मिली है। शनिवार को चौथे दिन वार्ताकारों ने प्रदर्शनकारियों से बात की। चौथे दिन की बातचीत के बाद प्रदर्शनकारियों के एक धड़े ने शाहीन बाग की एक नौ नंबर सड़क खोलने की हामी भर दी। थोड़ी देर के लिए सड़क खुली भी पर थोड़ी ही देर के बाद उस पर फिर से बैरीकेड्स लगा दिए गए। हालांकि थोड़ी देर के बाद इसे फिर खोला गया।

इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त दो वार्ताकारों में से एक वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े के सामने सड़क खाली करने के लिए कुछ शर्तें रखीं। उन्होंने 24 घंटे की सुरक्षा मांगी और यह भी कहा कि इसका आदेश सुप्रीम कोर्ट पास करे क्योंकि उनको पुलिस पर भरोसा नहीं है। उन्होंने शाहीन बाग और जामिया इलाके में लोगों पर दर्ज मामले वापस लेने की भी मांग की। बहरहाल, शनिवार की बातचीत के बाद प्रदर्शन की जगह के पास नौ नंबर की सड़क खोल दी गई। यह सड़क जामिया से कालिंदी कुंज होते हुए नोएडा जाती है।  प्रदर्शनकारियों ने नागरिकता कानून के खिलाफ चल प्रदर्शन के तहत इसे बंद कर रखा था।

हालांकि इस सड़क के खुल जाने से जामिया से नोएडा और नोएडा से जामिया जाने वाले लोगों को कोई राहत नहीं मिलने वाली थी। क्योंकि महामाया फ्लाइओवर पर रास्ता अब भी बंद है। यह रास्ता उत्तर प्रदेश पुलिस और दिल्ली पुलिस ने बंद किया हुआ है। गौरतलब है कि शाहीन बाग में पिछले करीब ढाई महीने से नागरिकता कानून का विरोध चल रहा है। विरोध कर रहे लोगों ने सड़क को बंद किया हुआ है। सड़क के बंद होने से हजारों लोगों को रोजमर्रा के कामों में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

लोगों के विरोध के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से कहा कि वे अपना प्रदर्शन जारी रख सकते हैं लेकिन किसी दूसरी जगह पर। इसके बाद सर्वोच्च अदालत ने दो वार्ताकारों को चुना और उन्हें जिम्मेदारी दी कि वे प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर मामले को सुलझाएं। सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन ने लगातार चार दिनों तक प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और पूरे मामले को समझने की कोशिश की।

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