गरीब पर टैक्स है एनआरसी

रायपुर। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर, एनपीआर और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, एनआरसी को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला किया है। राहुल ने कहा कि एनपीआर और एनआरसी देश की गरीब जनता पर लगाए जाने वाले टैक्स की तरह है। उन्होंने इसकी तुलना नोटबंदी से भी की और कहा कि नोटबंदी के समय आम लोगों से इकट्ठा किया गया पैसा 15-20 बड़े लोगों में बांट दिया गया।

आदिवासी नृत्य महोत्सव में शामिल होने के लिए पहुंचे राहुल गांध ने हवाईअड्डे पर संवाददताओं से बातचीत के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा- चाहे एनआरसी हो या एनपीआर हो, यह हिंदुस्तान के गरीब लोगों पर एक टैक्स है।उन्होंने कहा- नोटबंदी भी हिंदुस्तान के गरीब लोगों पर एक टैक्स था। बैंक में जाइए, पैसा दीजिए, अपने एकाउंट से पैसा नहीं निकालिए और पूरा का पूरा पैसा 15 से 20 लोगों को दे दिया गया। एनआरसी, एनपीआर भी बिल्कुल वहीं चीज है।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अब गरीबों को कागज बनवाने के नाम पर रिश्वत देनी पडेगी। उन्होंने इसे गरीबों पर हमला करार दिया।राहुल ने अर्थव्यवस्था और रोजगार की स्थित पर भी केंद्र सरकार पर हमला किया।उन्होंने कहा- आज पूरी दुनिया में कहा जा रहा है कि हिंदुस्तान में हिंसा हो रही है। महिलाओं को यहां सड़कों पर नहीं चलने दिया जा रहा है और बेरोजगारी 45 साल में सबसे ज्यादा है लेकिन प्रधानमंत्री कुछ कर नहीं पा रहे हैं। रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के शुभारंभ के मौके पर आयोजित एक सभा में राहुल गांधी ने कहा- सभी धर्मों, जातियों, आदिवासियों, दलितों और पिछड़ों को साथ लिए बिना हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था नहीं चलाई जा सकती।केंद्र सरकार की ओर इशारा करते हुएराहुल ने कहा- जब तक आप इस देश को जोड़ेंगे नहीं, जब तक देश के लोगों की आवाज विधानसभाओं और लोकसभा में सुनाई नहीं देगी, तब तक रोजगार और अर्थव्यवस्था के बारे में कुछ किया जा सकेगा।

क्योंकि अर्थव्यवस्था को किसान, मजदूर, गरीब, आदिवासी ही चलाते हैं।

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