राजस्थान ने पास सीएए विरोधी प्रस्ताव

जयपुर। केरल और पंजाब के बाद अब राजस्थान विधानसभा ने भी संशोधित नागरिकता कानून, सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पास कर दिया है। पिछले दिनों केरल और पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पास होने के बाद इस पर विवाद हुआ था, जिसके बाद कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल ने कहा था कि विरोध करना राज्यों का अधिकार है। पर साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय कानून को नहीं लागू करना राज्यों के लिए संभव नहीं है।

बहरहाल, शनिवार को विधानसभा में सीएए विरोधी प्रस्ताव पास हुआ और साथ ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर, एनपीआर के प्रपत्र में हुए संशोधनों को लेकर भी संकल्प पास हुआ। गौरतलब है कि राजस्थान पहला राज्य है, जहां एनपीआर के संशोधनों को लेकर कोई संकल्प पास किया गया है। विधानसभा में दोनों प्रस्ताव पास होने के बाद विधानसभा की कार्यवाही 10 फरवरी सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

शनिवार को जब विधानसभा में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया तो विपक्ष ने विरोध किया। भाजपा के सदस्य वेल में पहुंच गए और सीएए के समर्थन में नारे लगाए। इससे पहले एससी-एसटी आरक्षण को बढ़ाने वाला 126वां संशोधन प्रस्ताव पारित किया गया। पिछले साल दिसंबर के शुरू में संसद से पास होने के बाद सबसे पहले केरल विधानसभा ने 31 दिसंबर 2019 को और पंजाब विधानसभा ने 17 जनवरी को नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास किया था।

राजस्थान विधानसभा में सीएए के खिलाफ पास किए गए प्रस्ताव में कहा गया कि संसद की ओर से पास किए गए सीएए के जरिए धर्म के आधार पर अवैध प्रवासियों को निशाना बनाया गया है। धर्म के आधार पर ऐसा भेदभाव ठीक नहीं है। यह संविधान की धर्मनिरपेक्ष वाली मूल भावना के खिलाफ है। यहीं कारण है कि सीएए के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं।

विधानसभा में पास संकल्प में एनआरसी और असम का भी जिक्र किया गया है। विधानसभा में बहस के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा- जब संसद ने यह कानून पारित कर दिया तो फिर आप इसे लागू क्यों नहीं कर रहे हैं। यह कानून तो आपको लागू करना ही पड़ेगा। दुनिया की कोई ताकत इसे नहीं रोक सकती।

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