राज्यपाल से फिर सत्र बुलाने को कहा

जयपुर । राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल को एक नया प्रस्ताव भेजा है। इसमें मुख्यमंत्री गहलोत ने 31 जुलाई को विधानसभा का सत्र बुलाने का प्रस्ताव दिया है। इससे पहले गहलोत सरकार की ओर से दिए गए प्रस्ताव में राज्यपाल ने कई कमियां निकाली थीं। उसी वजह से नया संशोधित प्रस्ताव भेजा गया है। इसे सात दिन की नोटिस के साथ भेजा गया है। पहले प्रस्ताव में सात दिन का समय नहीं दिया गया था।

बताया जा रहा है कि राज्य सरकार के इस नए संशोधित प्रस्ताव में बहुमत परीक्षण का जिक्र नहीं किया गया है। इस बीच रविवार को एक बार फिर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने होटल फेयर माउंट में सुबह योग क्लास के बाद विधायकों के साथ बैठक की। बताया जा रहा है कि गहलोत शनिवार को रात साढ़े 11 बजे होटल पहुंचे थे और वहीं रूके थे। राज्यपाल को नया प्रस्ताव भेजे जाने के बाद कांग्रेस नेताओं ने उम्मीद जताई है कि इस बार राज्यपाल विधानसभा सत्र बुलाने का फैसला करेंगे।

रविवार को दोपहर में कांग्रेस नेता अजय माकन ने जयपुर में प्रेस कांफ्रेंस की और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी कोरोना से लड़ने की बजाय कांग्रेस से लड़ रहे हैं। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा- बहुमत की हत्या हो रही है। क्या देश को प्रजातंत्र और संविधान पर भाजपा का हमला स्वीकार है? क्या बहुमत और जनमत का फैसला राजस्थान की आठ करोड़ की जनता को वोट से होगा या दिल्ली के हुक्मरानों के सत्ता बल और धन बल से होगा?

कांग्रेस ने राजस्थान की मिसाल देते हुए सवालिया लहजे में कहा कि क्या बहुमत से चुनी राजस्थान सरकार द्वारा बुलाए गए विधानसभा सत्र को राज्यपाल इजाजत देने से इनकार कर संविधान की अवहेलना कर सकते हैं? क्या राज्यपाल विधायिका के आधार क्षेत्र में असंवैधानिक तौर पर दखलअंदाजी कर सकते हैं? क्या इससे विधायिका और न्यायपालिका में टकराव की स्थिति पैदा नहीं होगी?

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