नागरिकता बिल पर मुहर

नई दिल्ली। लंबी जद्दोजहद और करीब आठ घंटे तक चली बहस के बाद नागरिकता कानून में संशोधन का विधेयक राज्यसभा से भी पास हो गया। लोकसभा ने इसे सोमवार को पास कर दिया था। इस तरह नागरिकता विधेयक पर संसद की मुहर लग गई। अब इसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद अधिसूचना जारी होगी और यह बिल कानून बन जाएगा। करीब आठ घंटे की चर्चा के बाद हुई वोटिंग में बिल के समर्थन में 125 और विपक्ष में 105 वोट पड़े।

इससे पहले बिल पर बुधवार को दिन भर हुई बहस के बाद शाम में इसका जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कही गई बातों को दोहराते हुए कांग्रेस को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि अगर भारत का बंटवारा नहीं हुआ होता तो यह बिल नहीं लाना होता। उन्होंने कहा- बंटवारे के बाद जो परिस्थितियां आईं, उनके समाधान के लिए मैं आज ये बिल लाया हूं। पिछली सरकारें समाधान लाई होतीं तो ये बिल न लाना होगा।

उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था, ये सबसे बड़ी भूल थी। उसी भूल के कारण ये बिल आज लाना पड़ा है। शाह ने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा- राजनीतिक कीजिए पर देश को मत बांटिए। इससे लगने वाली आग से अपना ही घर जलता है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि बिल से अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं होता है।

इससे पहले बुधवार को दिन में 12 बजे यह बिल पेश करते हुए अमित शाह ने देश के मुसलमानों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि उनको डरने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत के मुसलमान भारतीय नागरिक थे, हैं और बने रहेंगे। गौरतलब है कि इस विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक आधार पर प्रताड़ित होकर भारत आने वाले गैर मुस्लिमों को भारत की नागरिकता मिलेगी।

इस विधेयक को उच्च सदन में पेश करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि इन तीनों देशों में अल्पसंख्यकों के पास समान अधिकार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इन देशों में अल्पसंख्यकों की आबादी कम से कम 20 फीसदी कम हुई है। इसकी वजह उनका सफाया, भारत प्रवास और अन्य हैं। शाह ने कहा कि इन प्रवासियों के पास रोजगार और शिक्षा के अधिकार नहीं थे। धर्म के आधार पर भेदभाव के विपक्षी पार्टियों के आरोपों का तीखे लहजे में जवाब देते हुए शाह ने कहा कि वे क्या चाहते हैं कि दुनिया भर के मुसलमानों को भारत आने दिया जाए और भारत उनको नागरिकता दे।

 

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