तेल, दाल, आलू अब जरूरी वस्तु नहीं, बिल पास

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कृषि से जुड़ा तीसरा विवादित बिल मंगलवार को राज्यसभा से पास करा लिया। विपक्षी सांसदों की गैरहाजिरी में आवश्यक वस्तु कानून में संशोधन के विधेयक को मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही दाल, तेल, कई अनाज, आलू, प्याज सहित खाने-पीने की लगभग सभी चीजें आवश्यक वस्तु की सूची से बाहर हो गई है और अब कोई भी कारोबारी कितनी भी मात्रा में इन वस्तुओं को स्टोर कर सकता है। सरकार ने अध्यादेश के जरिए इसे लागू किया था। नया कानून उसी अध्यादेश की जगह लेगा।

राज्यसभा ने मंगलवार को आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक को चर्चा के बाद ध्वनि मत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे 15 सितंबर को ही पारित कर चुकी है। इस विधेयक का मकसद निजी निवेशकों की कुछ आशंकाओं को दूर करना है। सरकार पहले ही कह चुकी है कि उत्पादन, उत्पादों को जमा करने, आवागमन, वितरण व आपूर्ति की स्वतंत्रता से बड़े स्तर पर अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिलेगा और कृषि क्षेत्र में निजी व विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आकर्षित होगा।  विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए उपभोक्ता मामलों और खाद्य व सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री रावसाहेब दानवे ने कहा कि कानून के जरिए स्टॉक की सीमा थोपने से कृषि क्षेत्र में निवेश में अड़चनें आ रही हैं।  उन्होंने कहा कि साढ़े छह दशक पुराने इस कानून में स्टॉक रखने की सीमा राष्ट्रीय आपदा व सूखे की स्थिति में मूल्यों में भारी वृद्धि जैसे आपात हालात उत्पन्न होने पर ही लागू की जाएगी। विधेयक में खाद्य प्रसंस्करण करने वाली कंपनियों और मूल्यवर्द्धन करने वाले पक्षों को स्टॉक सीमा से छूट दी गयी है।  दानवे ने कहा कि इस कदम से कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और अधिक भंडारण क्षमता सृजित होने से फसलों की कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।  उन्होंने कहा- यह संशोधन किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के पक्ष में है।

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