याद रहे अहिंसा का मंत्र: कोविंद

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने लोकतंत्र के लिए सत्ता और विपक्ष दोनों को महत्त्वपूर्ण बताते हुए सभी को, खासकर युवाओं को महात्मा गाँधी के अहिंसा के मंत्र को याद रखने की सलाह दी।

श्री कोविन्द ने 71 वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या के संदेश में कहा कि किसी उद्देश्य के लिए संघर्ष करने वाले लोगों, विशेष रूप से युवाओं, को महात्मा गांधी के अहिंसा के मंत्र को सदैव याद रखना चाहिये जो मानवता को उनका अमूल्य उपहार है। कोई भी कार्य उचित है या अनुचित यह तय करने के लिए गाँधीजी की मानव कल्याण की कसौटी लोकतंत्र पर भी लागू होती है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए गांधीजी के विचार आज भी पूरी तरह से प्रासंगिक हैं। गांधीजी के सत्य और अहिंसा के संदेंश पर चिंतन-मनन करना हमारी दिनचर्या का हिस्सा होना चाहिये। उन्होंने कहा, “संविधान ने नागरिकों को कुछ अधिकार प्रदान किये हैं, लेकिन इसके तहत हम सबने यह जिम्मेदारी ली है कि हम न्याय, स्वतंत्रता, समानता तथा भाईचारे के मूल लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहें। राष्ट्र के निरंतर विकास और भाईचारे के लिए यही सबसे उत्तम मार्ग है।”

श्री कोविंद ने लोकतंत्र में सत्ता पक्ष एवं विपक्ष दोनों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि राजनैतिक विचारों की अभिव्यक्ति के साथ-साथ देश के समग्र विकास और लोगों के कल्याण के लिए दोनों को मिलजुल कर आगे बढ़ना चाहिये।

राष्ट्रपति ने विकास योजनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि स्वच्छ भारत अभियान में बहुत ही कम समय में प्रभावशाली सफलता हासिल हुई है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की उपलब्धियां गर्व करने योग्य है, जिसमें आठ करोड़ लाभार्थी शामिल हो चुके हैं। सौभाग्य योजना से लोगों के जीवन में नयी रोशनी आयी है और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से लगभग 14 करोड़ किसान प्रतिवर्ष छह हजार रुपये की आय प्राप्त करने के हकदार बने हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जल जीवन मिशन भी स्वच्छ भारत अभियान की तरह एक जन-आंदोलन बनेगा।

श्री कोविंद ने देश की कर प्रणाली की चर्चा करते हुए कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से एक देश एक कर एक बाजार की अवधारणा को साकार रूप मिला है। इसके साथ ही ई-नाम योजना से एक राष्ट्र के लिए एक बाजार बनाने की प्रक्रिया मजबूत हुई है।

श्री कोविंद ने देश की सेनाओं, अर्द्धसैनिक बलों और आंतरिक सुरक्षाबलों की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाये रखने में उनका बलिदान, अदम्य साहस और अनुशासन की अमरगाथाएं प्रस्तुत करता है। किसान, डॉक्टर, नर्स, शिक्षक, वैज्ञानिक, इंजीनियर, श्रमिक, उद्यमी, कलाकार, प्रोफेशनल्स और होनहार बेटियां देश का गौरव हैं।

उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए सुदृढ आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था का होना जरूरी है, इसलिए सरकार ने आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए अनेक ठोस कदम उठाये हैं1

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