किसानों के योगदान को राष्ट्रपति ने किया याद

नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किसानों के योगदान को याद किया और उनकी जम कर तारीफ की। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सीमा पर पिछले 61 दिन से किसानों का आंदोलन चल रहा है। किसान केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। इस आंदोलन के बीच राष्ट्रपति ने कहा- हर भारतीय उन किसानों को सलाम करता है, जिन्होंने हमारे बड़े आबादी वाले देश को अनाज और डेयरी उत्पादों में आत्मनिर्भर बनाया।

राष्ट्रपति ने कहा- प्राकृतिक आपदाओं, कोरोना महामारी और कई अन्य चुनौतियों के बावजूद हमारे किसानों ने उत्पादन जारी रखा, जिससे हम कोरोना की लड़ाई जारी रख सके। उन्होंने कहा कि देश किसानों की भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कोविंद ने विविधता में एकता की बात करते हुए कहा- विविधता के बाद भी हमारा देश एकजुट है। हमारे देश में अलग-अलग धर्मों के त्योहार मनाए जाते हैं। उसी तरह राष्ट्रीय त्योहारों को भी सभी लोग देशभक्ति के साथ मनाते हैं। यह वह दिन है, जो संविधान के मूल मूल्यों पर निर्भर करता है। हमारे संविधान के ये मूल्य न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व हैं। जिसका हम सभी को पालन करना होता है।

राष्ट्रपति ने देश के सैनिकों की भी जम कर तारीफ की। उन्होंने कहा- लद्दाख में सियाचिन और गलवान घाटी की ठंड जहां तापमान माइनस 50 से माइनस 60 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है या फिर जैसलमेर की चिलचिलाती गर्मी, जहां तापमान 50 डिग्री सेल्सियस रहता है। जमीन पर, आसमान में और समुद्री इलाकों में हमारे योद्धा पूरी तरह तैयार हैं।

कोरोना की महामारी से देश की लड़ाई का भी राष्ट्रपति ने जिक्र किया। उन्होंने कहा- हमारे वैज्ञानिक, डॉक्टर, प्रशासकों और देश की जनता ने कोरोना की लड़ाई में आगे बढ़ कर योगदान दिया। इसी वजह से विकसित देशों की तुलना में हमारे देश में कोरोना की वजह से मृत्यु दर पर काबू पाया जा सका। उन्होंने कहा- हमारे किसान, जवान और वैज्ञानिक खास बधाई और प्रोत्साहन के हकदार हैं।

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