लॉकडाउन में वेतन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

नई दिल्ली। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए देश भर में लागू लॉकडाउन की अवधि में कर्मचारियों को पूरा वेतन देने के सरकार के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए से इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

लॉकडाउन के दौरान अपने कर्मचारियों को पूरा वेतन देने संबंधी गृह मंत्रालय की अधिसूचना को नागरीका एक्सपोर्ट्स और फिक्स पैक्स प्रा. लि. सहित तीन निजी कंपनियों ने चुनौती दी है। पीठ ने अपने आदेश में कहा- सॉलिसीटर जनरल इन याचिकाओं पर जवाब दाखिल करना चाहते हैं। दो सप्ताह बाद इसे सूचीबद्ध किया जाए।

सर्वोच्च अदालत ने इन निजी फर्मों से कहा कि वे अपने आवेदनों की प्रति ई-मेल के जरिए सॉलिसीटर जनरल को उपलब्ध कराएं। टेक्सटाइल फर्म नागरीका एक्सपोर्ट्स लि. ने फैक्टरियों के चालू नहीं होने के बावजूद अपने स्टाफ, ठेका मजदूरों, दिहाड़ी मजदूरों और अन्य श्रमिकों को लॉकडाउन के दौरान पूरा वेतन देने के सरकार के आदेश को निरस्त करने का अनुरोध किया है। इस फर्म ने अपनी याचिका में कहा है कि लॉकडाउन की वजह से फैक्टरियों में काम बंद होने की वजह से उसे अब तक करीब डेढ़ करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है।

याचिका में कहा गया है कि इसके अलावा सरकार ने 29 और 31 मार्च के आदेशों में सभी कर्मचारियों को पूरा वेतन देने का आदेश दिया है, जो करीब पौने दो करोड़ रुपए है। याचिका में कर्मचारियों को पूरा वेतन देने के बारे में केंद्र और महाराष्ट्र सरकार के आदेशों को निरस्त करने का अनुरोध किया गया है। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने इस मामले का निबटारा होने तक उसे अपने कामगारों को 50 फीसदी वेतन का भुगतान करने की अनुमति भी मांगी है।

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