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शाह ने कोरोना महामारी के दौरान दिल्ली पुलिस के काम को सराहा

नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कोरोनावायरस की स्थिति से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस की सराहना की और कहा कि कई कार्मिकों के वायरस से पीड़ित होने के बावजूद, बल ने सावधानीपूर्वक उन सभी चुनौतियों का सामना किया जो 2020 में उनके रास्ते में आईं।

शाह ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय का दौरा किया और इस दौरान पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए महामारी से निपटने में उनकी उत्कृष्ट भूमिका के लिए बधाई दी।

शाह ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कहा, “उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा से निबटना हो, कोरोनावायरस के प्रकोप के बाद घोषित लॉकडाउन हो या प्रवासी कामगारों का आवागमन हो, दिल्ली पुलिस ने लोगों को उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान की हैं।”

उन्होंने कहा कि चाहे किसान आंदोलन में किसानों के साथ चर्चा करके समन्वय स्थापित करना हो या फिर हर प्रकार की चुनौती का सामना हो, पुलिस ने हर एक काम बखूबी किया है। शाह ने कहा, “मैं दिल्ली पुलिस को इसके सभी प्रयासों के लिए बधाई देना चाहूंगा।”

उन्होंने कहा कि पुलिस बल के समग्र विकास और कार्य के लिए हर कांस्टेबल का काम महत्वपूर्ण है।

शाह ने कहा कि दिल्ली पुलिस का काम काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह रणनीतिक स्थान दिल्ली में तैनात हैं, जहां राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास, विभिन्न दूतावास, ऐतिहासिक स्मारक और कई महत्वपूर्ण अनुसंधान और विकास संस्थान शामिल हैं।

शाह ने जोर दिया कि दिल्ली पुलिस को हर वक्त सुधार पर नजर रखनी है। उन्होंने कहा, “दिल्ली पुलिस को सुधार व्यवस्था का पालन भी करना चाहिए। कभी-कभी महत्वाकांक्षा और सुधारात्मक उद्देश्य हमें आगे ले जाते हैं। यह तभी हो सकता है, जब पुलिस शीर्ष से निचले क्रम तक एक टीम के रूप में समन्वय में काम करती है।”

उन्होंने कहा कि कोविड को हराने के लिए हमें टीकाकरण पर प्रभावी ढंग से काम करना होगा।

शाह ने कहा, “दिल्ली पुलिस के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं, जिन्हें पारंपरिक तरीकों से हासिल नहीं किया जा सकता है और तकनीकों और बुनियादी ढांचे में सुधार की जरूरत है। मुझे खुशी है कि राष्ट्रीय फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) और दिल्ली पुलिस ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।”

शाह ने अपराधियों को न्याय दिलाने के लिए फोरेंसिक कार्यो की प्रभावशीलता और वैज्ञानिक सबूतों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपराधियों को गिरफ्तार करने से नहीं, बल्कि अपराधियों को न्याय दिलाने के लिए अपराध नियंत्रित हो सकता है।

एनएफएसयू के लगभग 119 फोरेंसिक अधिकारी दिल्ली पुलिस को उनकी फोरेंसिक जांच में मदद करेंगे, ताकि दोषियों की सजा की दर बढ़ सके।

शाह ने गुमशुदा बच्चों को उनके अभिभावकों से पुन: मिलाने की दिल्ली पुलिस की पहल की भी प्रशंसा की। गृहमंत्री ने गुमशुदा बच्चों को ढूंढ निकालने में दिल्ली पुलिस के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस संबंध में पुलिस अधिकारियों को दी गई पदोन्नति अन्य बलों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने कहा कि आपराधिक घटनाओं में प्रभावी ढंग से कमी लाने के लिए राजधानी में सभी सीसीटीवी कैमरों को जोड़ने की योजना है।

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कोरोना से मरने वालों के परिजनों को सरकार मुआवजा नहीं दे सकेगी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वह कोरोना से मरने वाले हर मरीज के परिजनों को मुआवजा नहीं दे सकती है। कोरोना से मरे लोगों के परिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर केंद्र सरकार ने अपना हलफनामा दायर किया है, जिसमें उसने कहा है कि वह सबको मुआवजा नहीं दे सकती है। केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि कोरोना से जिनकी मौत हुई है, उनके परिवारों को सरकार चार लाख रुपए का मुआवजा नहीं दे सकेगी। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कोरोना से होने वाली हर मौत को कोविड मौत के रूप में दर्ज किया जाएगा।

सरकार ने कहा है कि आपदा कानून के तहत अनिवार्य मुआवजा सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़ आदि पर ही लागू होता है। सरकार का कहना है कि अगर एक बीमारी से होने वाली मौत पर मुआवजा दिया जाए और दूसरी पर नहीं, तो यह गलत होगा। केंद्र ने 183 पन्नों के अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि इस तरह का भुगतान राज्यों के पास उपलब्ध राज्य आपदा मोचन कोष यानी एसडीआरएफ से होता है। अगर राज्यों को हर मौत के लिए चार लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया गया, तो उनका पूरा फंड ही खत्म हो जाएगा।

केंद्र का कहना है कि अगर कोरोना से मरे लोगों को चार लाख का मुआवजा देने का राज्यों को निर्देश दिया गया तो इससे कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई के साथ ही बाढ़, चक्रवात जैसी आपदाओं से भी लड़ पाना असंभव हो जाएगा। केंद्र ने अदालत को बताया कि कोरोना से होने वाली सभी मौतों को कोविड से हुई मौत के रूप में ही रिकार्ड किया जाना चाहिए। फिर चाहे वह मौतें कहीं भी क्यों न हुईं हों।

गौरतलब है कि अब तक सिर्फ अस्पतालों में हुई कोरोना संक्रमितों की मौत को ही कोविड डेथ के रूप में रिकार्ड किया जाता था। घर पर या अस्पताल की पार्किंग या गेट पर होने वाली मौतों को भी कोविड रिकार्ड में दर्ज नहीं किया जा रहा था। इस वजह से मौत के आंकड़ों में विसंगतियां देखने को मिल रही थीं। सरकार ने इस तरह की हर मौत को कोविड डेथ के रूप में दर्ज करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई सोमवार को करेगा।

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