शौरी, भूषण और एन राम ने वापस ली याचिका

नई दिल्ली। आपराधिक अवमानना कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री अरूण शौरी, पत्रकार एन राम और अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की थी उसे उन्होंने वापस ले लिया है। अदालत के आदेश के बाद उनकी याचिका वापस हो गई। इन तीनों के वकील ने अदालत से याचिका वापस लेने का अनुरोध किया था, जिसकी अदालत ने मंजूरी दे दी।

जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ को याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने बताया कि वे अपनी याचिका वापस लेना चाहते हैं, क्योंकि इसी मामले पर पहले से ही कई याचिकाएं लंबित हैं और वे नहीं चाहते कि यह याचिका उनके साथ ‘अटक’ जाए। पीठ ने याचिकाकर्ताओं को इस छूट के साथ याचिका वापस लेने की अनुमति दी कि वे सर्वोच्च अदालत के अलावा अन्य उचित न्यायिक मंच पर जा सकते हैं।

राजीव धवन ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई संक्षिप्त सुनवाई में कहा कि याचिकाकर्ता इस चरण पर इस छूट के साथ याचिका वापस लेना चाहते हैं कि उन्हें दुबारा, हो सकता है दो महीने बाद, सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाने की अनुमति दी जाए। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में ‘अदालत को बदनाम करने’ को लेकर आपराधिक अवमानना से जुड़े न्यायालय की अवमानना कानून की धारा 2 (सी)(1) की संवैधानिक वैधता को संविधान के अनुच्छेद 19 में दिए गए अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार के संदर्भ में चुनौती दी थी।

 

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