अब तक छह लाख 31 हजार टीके लगे

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ‘दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान’ की शुरुआत की थी लेकिन चार दिन बाद मंगलवार तक पूरे देश में सिर्फ चार लाख 31 हजार 417 लोगों को टीका लग पाया है। सरकार ने भी माना है टीकाकरण की रफ्तार कम है और जल्दी ही इसे बढ़ाया जाए। कई बड़े राज्यों में टीका लगवाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वालों में से 50 फीसदी ने भी टीका नहीं लगवाया। हालांकि छोटे राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों जैसे लक्षद्वीप, दादर-नागर हवेली, अंडमान निकोबार में 80 फीसदी से ज्यादा लोगों ने टीके लगवाए। तमिलनाडु, पंजाब, पुड्डुचेरी आदि राज्यों में बहुत कम लोगों ने टीके लगवाए।

बहरहाल, मंगलवार को साप्ताहिक रिपोर्ट पेश करते हुए स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया कि देश में अब तक चार लाख 54 हजार 49 लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। हालांकि देर रात सरकार मंगलवार को शाम छह बजे तक डाटा जारी करके बताया कि कुल छह लाख 31 हजार से ज्यादा लोगों को टीका लगाया है।

इससे पहले सरकार ने शाम में बताया था कि सिर्फ 0.18 फीसदी में साइड इफेक्ट देखने को मिला है। इनमें से भी बहुत कम लोगों को अस्पताल में भरती कराना पड़ा है। उन्होंने कहा कि दुनिया के दूसरे देशों में इससे ज्यादा साइड इफेक्ट देखने को मिले हैं। राजेश भूषण ने कहा कि भारत में वैक्सीन लगाने के बाद दो मौतें हुई हैं। लेकिन उसका वैक्सीनेशन से कोई मतलब नहीं है।

वैक्सीन के लिए बनी विशेषज्ञ समिति से जुड़े नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने लोगों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है। लोगों को किसी तरह के भ्रम में नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा- मैंने खुद कोवैक्सिन का डोज लगवाया है और मैं पूरी तरह स्वस्थ्य महसूस कर रहा हूं। वैक्सीन लगवाने में डरना नहीं चाहिए। पॉल ने वैक्सीनेशन की धीमी रफ्तार की पुष्टि करते हुए कहा- अभी वैक्सीनेशन की स्पीड स्लो है। लोग डर रहे हैं। सभी स्वास्थ्यकर्मियों को इसे लगवाना चाहिए। तभी हम पुरानी जिंदगी जी सकेंगे।

डॉक्टर पॉल ने डॉक्टरों और नर्सों से कहा कि वे लोग अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन करें और वैक्सीन लगवाइएं ताकि बाकी लोगों में भी भरोसा आ सके। उन्होंने कहा कि जितनी भी वैक्सीन उपलब्ध होगी वो देश के हर व्यक्ति तक जल्दी से जल्दी पहुंचाई जाएगी। स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया कि देश में दो कोरोना वैक्सीन लगाई जा रहीं हैं। केंद्र सरकार की तरफ से सभी राज्यों को दोनों वैक्सीन उपलब्ध कराई गई है। अब कौन सी वैक्सीन कहां लगाई जाएगी ये तय करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। इसमें केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं है।

कंपनियों ने दी साइड इफेक्ट्स की जानकारी

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए वैक्सीन लगना शुरू होने के चार दिन बाद वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों ने इसके साइड इफेक्ट्स के बारे में जानकारी दी है और साथ ही लोगों के लिए कुछ निर्देश भी जारी किए हैं। पहले केंद्र सरकार ने कहा था कि कमजोर इम्युनिटी वाले या इम्युनिटी बढ़ाने की दवा ले रहे मरीज भी कोरोना वैक्सीन लगवा सकते हैं, लेकिन अब कंपनियों की ओर से कहा गया है कि ऐसे लोग वैक्सीन न लगवाएं।

वैक्सीनेशन शुरू होने के बाद साइड इफेक्ट्स को लेकर आ रही खबरों के बाद भारत बायोटेक ने मंगलवार को फैक्टशीट जारी की और कहा कि कमजोर इम्युनिटी वाले और इम्युनिटी बढ़ाने की दवा ले रहे मरीज कोवैक्सिन न लगवाएं। अगर ऐसे लोग कोवैक्सिन लगवाते हैं तो उन्हें गंभीर एलर्जिक रिएक्शन हो सकते हैं। इसके साथ ही जिन्हें बुखार है, वे भी वैक्सीन न लगवाएं। गर्भवती महिलाओं और बच्चों को अपना दूध पिला रही महिलाओं को भी वैक्सीन नहीं लगवाने के लिए पहले ही कहा जा चुका है। गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों को भी वैक्सीन नहीं लगवानी है।

गौरतलब है कि सरकार ने भारत बायोटेक की कोवैक्सिन को क्लीनिकल ट्रायल मोड में सीमित इस्तेमाल की मंजूरी दी है। भारत सरकार ने जिन लोगों को कोरोना वैक्सीनेशन के प्राथमिकता समूह में रखा है, उन्हें वैक्सीन लगाई जा रही है। वैक्सीनेशन सेंटर पर प्रोग्राम अधिकारी उन्हें वैक्सीन के बारे में जानकारी देंगे। इसके बाद भी अगर कोई व्यक्ति कोवैक्सिन लगवाने से इनकार करता है तो उसे यह नहीं लगाई जाएगी।

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