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केंद्र पूरी तरह नाकाम: सोनिया

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर कोरोना के प्रबंधन में पूरी तरह से नाकाम रहने का आरोप लगाया है। उन्होंने कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में केंद्र पर निशाना साधा और कहा कि सरकार ने अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया है। सोनिया ने सभी पार्टियों की बैठक बुलाने की एक बार फिर अपील की और कहा कि राष्ट्रीय इच्छाशक्ति और संकल्प दिखाने के लिए जरूरी है कि सर्वदलीय बैठक हो।

पांच राज्यों के चुनाव नतीजों पर विचार के लिए सोमवार को कांग्रेस कार्य समिति की डिजिटल बैठक में सोनिया गांधी ने टीकाकरण का मुद्दा भी उठाया और कहा कि देश के सभी नागरिकों को बिल्कुल मुफ्त में टीका लगना चाहिए। बुलाई जानी चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष ने कार्य समिति की पिछली बैठक का जिक्र करते हुए कहा- पिछले 17 अप्रैल को हम लोग मिले थे। इसके बाद चार हफ्तों के दौरान कोविड-19 के हालात और भी भयावह हो गए। सरकार की नाकामियां और भी सामने आ गईं। वैज्ञानिक सलाह को जान बूझकर नजरअंदाज किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने महामारी को लेकर लापरवाही बरती और कोरोना फैलाने वाले कार्यक्रमों को जान बूझकर अनुमति दी, जिसकी देश भारी कीमत चुका रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा- देश में स्वास्थ्य व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। टीकाकरण की गति बहुत धीमी है और इसका विस्तार उस गति से नहीं किया जा रहा है, जिसकी जरूरत है। उन्होंने कहा- मोदी सरकार ने अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया है। उसने 18 से 45 साल तक के करोड़ों लोगों के टीकाकरण के खर्च का बोझ राज्यों पर डाल दिया है।

सोनिया गांधी ने इशारों में सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हवाला देते हुए कहा- कई विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र की ओर से टीकाकरण के खर्च का वहन करना बेहतर होता और वित्तीय रूप से भी उचित होता। लेकिन हम जानते हैं कि मोदी सरकार की दूसरी प्राथमिकताएं हैं जैसे कि वह दिखावटी परियोजनाओं को जनमत से इतर जाकर पूरा करना चाहती है। सोनिया ने यह आरोप भी लगाया कि केंद्र सरकार विपक्ष शासित राज्यों के साथ लगातार भेदभाव कर रही है।

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कोरोना से मरने वालों के परिजनों को सरकार मुआवजा नहीं दे सकेगी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वह कोरोना से मरने वाले हर मरीज के परिजनों को मुआवजा नहीं दे सकती है। कोरोना से मरे लोगों के परिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर केंद्र सरकार ने अपना हलफनामा दायर किया है, जिसमें उसने कहा है कि वह सबको मुआवजा नहीं दे सकती है। केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि कोरोना से जिनकी मौत हुई है, उनके परिवारों को सरकार चार लाख रुपए का मुआवजा नहीं दे सकेगी। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कोरोना से होने वाली हर मौत को कोविड मौत के रूप में दर्ज किया जाएगा।

सरकार ने कहा है कि आपदा कानून के तहत अनिवार्य मुआवजा सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़ आदि पर ही लागू होता है। सरकार का कहना है कि अगर एक बीमारी से होने वाली मौत पर मुआवजा दिया जाए और दूसरी पर नहीं, तो यह गलत होगा। केंद्र ने 183 पन्नों के अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि इस तरह का भुगतान राज्यों के पास उपलब्ध राज्य आपदा मोचन कोष यानी एसडीआरएफ से होता है। अगर राज्यों को हर मौत के लिए चार लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया गया, तो उनका पूरा फंड ही खत्म हो जाएगा।

केंद्र का कहना है कि अगर कोरोना से मरे लोगों को चार लाख का मुआवजा देने का राज्यों को निर्देश दिया गया तो इससे कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई के साथ ही बाढ़, चक्रवात जैसी आपदाओं से भी लड़ पाना असंभव हो जाएगा। केंद्र ने अदालत को बताया कि कोरोना से होने वाली सभी मौतों को कोविड से हुई मौत के रूप में ही रिकार्ड किया जाना चाहिए। फिर चाहे वह मौतें कहीं भी क्यों न हुईं हों।

गौरतलब है कि अब तक सिर्फ अस्पतालों में हुई कोरोना संक्रमितों की मौत को ही कोविड डेथ के रूप में रिकार्ड किया जाता था। घर पर या अस्पताल की पार्किंग या गेट पर होने वाली मौतों को भी कोविड रिकार्ड में दर्ज नहीं किया जा रहा था। इस वजह से मौत के आंकड़ों में विसंगतियां देखने को मिल रही थीं। सरकार ने इस तरह की हर मौत को कोविड डेथ के रूप में दर्ज करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई सोमवार को करेगा।

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