ब्याज माफी पर अदालत ने मांगा जवाब

नई दिल्ली। आम लोगों के लिए मुश्किल का सबब बने एक बेहद अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय से जवाब मांगा है। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए लागू लॉकडाउन की वजह से कर्ज की किश्तें स्थगित रखने की अवधि का ब्याज माफ करने के मामले पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मसले पर सर्वोच्च अदालत ने वित्त मंत्रालय से जवाब मांगा है। 12 जून तक इस मामले में जवाब दाखिल किया जाना है।

भारतीय रिजर्व बैंक पहले ही कह चुका है कि बैंकों की माली हालत को जोखिम में डालते हुए जबरन ब्याज माफ करना उचित नहीं होगा। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इस मामले में उसके सामने विचार के लिए दो पहलू हैं। पहला कर्ज की किश्तें स्थगित करने अवधि के दौरान कर्ज पर ब्याज नहीं लिया जाए और दूसरा ब्याज पर कोई ब्याज नहीं लिया जाए। गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ने कर्ज की किश्तें भरने से लोगों को पहले तीन महीने की छूट दी थी, जिसे तीन महीने और बढ़ा दिया गया है।

जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यह चुनौतीपूर्ण समय है और यह एक गंभीर मुद्दा है क्योंकि, जहां एक ओर कर्ज का भुगतान स्थगित किया गया है वहीं दूसरी ओर कर्ज पर ब्याज लिया जा रहा है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने 27 मार्च को इस बारे में अधिसूचना जारी की थी। उस अधिसूचना के उस अंश को असंवैधानिक घोषित करने के लिए गजेंद्र शर्मा ने एक याचिका दायर की है, जिसमे कर्ज के स्थगन की अवधि में कर्ज की राशि पर ब्याज लिया जा रहा है। आगरा के रहने वाले शर्मा ने कर्ज स्थगन की अवधि के दौरान की कर्ज की राशि के भुगतान पर ब्याज नहीं वसूलने का निर्देश देने की अपील की है।

केंद्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वे इस संबंध में वित्त मंत्रालय का जवाब दाखिल करना चाहेंगे और इसके लिए उन्हें वक्त चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव दत्ता ने कहा कि अब स्थिति साफ है और रिजर्व बैंक कह रहा है कि बैंक की लाभदायकता प्रमुख है। दत्ता ने कहा कि रिजर्व बैंक के कहने का मतलब यह हुआ कि महामारी के दौरान जब पूरा देश समस्याग्रस्त है तो सिर्फ बैंक ही लाभ कमा सकते हैं।

इस मामले की सुनवाई शुरू होते ही पीठ ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि रिजर्व बैंक का जवाब अदालत के सामने आने से पहले ही मीडिया को लीक कर दिया गया। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुई सख्त चेतावनी दी।

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