राफेल पर केंद्र को क्लीन चिट

नई दिल्ली। राफेल लड़ाकू विमान खरीद सौदे में केंद्र सरकार को एक बार फिर क्लीन चिट मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 14 दिसंबर को दिए अपने फैसले को फिर से दोहराया है और उस फैसले पर फिर से विचार के लिए दायर की गई तमाम याचिकाओं को खारिज कर दिया है। सर्वोच्च अदालत के राफेल सौदे में केंद्र सरकार को क्लीन चिट देने के फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थीं। अदालत ने इन सबको खारिज कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाएं पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी और मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता व वकील प्रशांत भूषण सहित कुछ अन्य लोगों ने दाखिल की थीं। इनमें पिछले साल 14 दिसंबर के उस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई थी, जिसमें फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट से 36 लड़ाकू विमान खरीदने के केंद्र सरकार के राफेल सौदे को क्लीन चिट दी गई थी।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसफ की पीठ ने राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील इस मामले पर दस मई को सुनवाई पूरी की थी और फैसला सुरक्षित रख लिया था। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के 17 नवंबर को रिटायर होने से पहले इस मामले में फैसला सुनाया गया है। याचिका देने वालों ने रक्षा मंत्रालय से लीक हुए कुछ दस्तावेजों के आधार पर पुनर्विचार याचिका दायर की थी। अदालत ने इसे सबूत मान कर फिर से सुनवाई करने का फैसला किया था।

चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने ललिता कुमारी मामले में दिए एक फैसले का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि संज्ञेय अपराध होने का खुलासा होने पर प्राथमिकी जरूरी है। पीठ ने कहा था- सवाल यह है कि आप ललिता कुमारी फैसले का पालन करने के लिए बाध्य हैं या नहीं। इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पीठ से कहा था कि पहली नजर में एक मामला होना चाहिए, नहीं तो एजेंसियां आगे नहीं बढ़ सकतीं। उन्होंने कहा था कि सूचना में संज्ञेय अपराध का खुलासा होना चाहिए।

गौरतलब है कि पिछले साल 14 दिसंबर को सर्वोच्च अदालत ने 58 हजार करोड़ रुपए के इस समझौते में कथित गड़बड़ी के खिलाफ जांच की मांग कर रही याचिकाओं को खारिज कर दिया था। सुनवाई पूरी करते हुए अदालत ने सौदे के संबंध में केंद्र से संप्रभु गारंटी से छूट और समझौते में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण उपबंध का न होने को लेकर सवाल किए थे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राफेल सौदे पर को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया था।

जस्टिस जोसेफ ने खोला जांच का रास्ता

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने राफेल सौदे में केंद्र सरकार को क्लीन चिट देने के अपने फैसले पर फिर से विचार करने के लिए दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है पर बेंच में शामिल एक जज जस्टिस केएम जोसेफ ने इस मामले की जांच का रास्ता खोल दिया है। जस्टिस जोसेफ ने कहा है कि इन पुनर्विचार याचिकाओं के खारिज होने के बाद भी सीबीआई शिकायतकर्ता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर जांच कर सकती है।

उन्होंने कहा- यह संज्ञेय अपराध दिखाई देता है। लेकिन इसके लिए एजेंसी को प्रीवेंशन ऑफ करप्शन कानून की धारा 17 के तहत सरकार से मंजूरी लेनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि पुनर्विचार याचिकाओं का खारिज होना सीबीआई की जांच के बीच में नहीं आएगा। जस्टिस जोसेफ ने पहले के सौदे का हवाला दिया था और केंद्र से पूछा था कि राफेल पर फ्रांसीसी प्रशासन के साथ अंतर-सरकारी समझौते में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का उपबंध क्यों नहीं है।

केंद्र सरकार के कानून अधिकारी ने कहा- अदालत इस तरह के तकनीकी पहलुओं पर फैसला नहीं कर सकती है। समझौते में संप्रभु गारंटी की छूट आदि से जुड़े सवाल पर वेणुगोपाल ने कहा था कि यह अभूतपूर्व कवायद नहीं है और रूस व अमेरिका के साथ ऐसे समझौतों का जिक्र किया, जिसमें ऐसी छूट दी गई। उन्होंने कहा- यह राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है। दुनिया की कोई अन्य अदालत इस तरह के तर्कों पर रक्षा सौदे की जांच नहीं करेगी।

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