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परमबीर की याचिका नामंजूर

नई दिल्ली। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया। सर्वोच्च अदालत ने सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि वे याचिका वापस ले सकते हैं और हाई कोर्ट में इसे दायर करने के लिए स्वतंत्र हैं। अदालत ने हालांकि यह माना कि परमबीर सिंह के लगाए आरोप गंभीर हैं लेकिन साथ ही यह भी कहा कि वे कुछ आरोप लगा रहे हैं और मंत्री कुछ और आरोप लगा रहे हैं। अदालत ने उनकी याचिका में कमियों का भी जिक्र किया। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा- हमे संदेह नहीं कि यह मामला बेहद गंभीर है। हाई कोर्ट जाने की छूट दी जाती है। इस पर परमबीर सिंह के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि सर्वोच्च अदालत बांबे हाई कोर्ट को इस मामले पर गुरुवार को सुनवाई का निर्देश दे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे भी ठुकरा दिया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के अनुसार वे आज ही हाई कोर्ट में याचिका लगाएंगे और चाहेंगे कि मामला कल सुना जाए। इस बारे में हाई कोर्ट से ही गुजारिश करनी होगी।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा- याचिकाकर्ता कुछ आरोप लगा रहे हैं और मंत्री भी कुछ आरोप लगा रहे हैं। मुझे नहीं समझ आता कि आपको हाई कोर्ट क्‍यों नहीं जाना चाहिए। हम मानते हैं कि मामला गंभीर है लेकिन अनुच्छेद 226 की शक्तियां काफी विस्‍तृत हैं। असल में अदालत ने पूछा था कि याचिका अनुच्छेद 32 के तहत क्यों दायर की गई है। इस रोहतगी कहा- यह देश के लिए जनहित का गंभीर मुद्दा है। एक पुलिस अधिकारी को प्रशासनिक आधार पर ट्रांसफर किया गया लेकिन गृह मंत्री ने खुद टीवी पर कहा कि यह एक प्रशासनिक ट्रांसफर नहीं था। कोर्ट ने इससे कम अहम मुद्दों पर आर्टिकल 32 की याचिकाओं को सुना है।रोहतगी ने दलील पेश करते हुए कहा- पूरा राज्‍य हिल गया है। पुलिस सुधार नहीं हुए हैं। इस पर जस्टिस कौल ने कहा- यह तो केवल इसी राज्‍य की बात नहीं है। उत्‍तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्‍य प्रदेश… हर जगह यही हाल है। मुझे लगता है कि गंभीर मामला है लेकिन हाई कोर्ट इसे देख सकती है।  जस्टिस कौल ने इससे पहले पूछा था- याचिका आर्टिकल 32 के तहत क्‍यों डाली गई, 226 के तहत क्‍यों नहीं? दूसरा जिस व्‍यक्ति के खिलाफ याचिका है, उसे पार्टी तक नहीं बनाया गया है। इस पर रोहतगी ने कहा कि देशमुख को पार्टी के तौर पर जोड़ने की याचिका दाखिल कर चुके हैं।

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