केंद्र व महाराष्ट्र सरकार को नोटिस

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में शुक्रवार की पूरी रात चले घटनाक्रम के बाद शनिवार की सुबह चुपके चुपके भाजपा की सरकार बनवाने के राज्यपाल के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर रविवार को छुट्टी के दिन विशेष सुनवाई हुई। रविवार की छुट्टी के बावजूद तीन जजों की बेंच सुनवाई करने को बैठी पर नतीजा कोई नहीं निकला। सर्वोच्च अदालत ने जल्दी बहुमत साबित करने का निर्देश देने की मांग पर ध्यान नहीं दिया और केंद्र व महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया। अदालत ने राज्यपाल की आमंत्रण वाली चिट्ठी और समर्थन पत्र की चिट्ठी की कॉपी दिखाने को कहा। आगे की सुनवाई सोमवार को साढ़े दस बजे होगी।

छुट्टी के दिन विशेष सुनवाई में जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने देवेंद्र फड़नवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने के महाराष्ट्र के राज्यपाल के फैसले को चुनौती देने वाली शिव सेना-एनसीपी-कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई की। इन तीनों पार्टियों की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए। दोनों वकीलों ने कहा कि सदन में शक्ति परीक्षा आज ही कराया जाना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि फड़नवीस के पास बहुमत है या नहीं।

सिब्बल और सिंघवी ने कहा कि चुनाव के बाद हुए शिव सेना-एनसीपी-कांग्रेस के गठबंधन के पास सदन में बहुमत हासिल है। सिब्बल ने मंत्रिमंडल की बैठक के बिना राष्ट्रपति शासन हटाए जाने को अजीब बताया है। वहीं सिंघवी ने कहा कि यह लोकतंत्र की हत्या है। भाजपा के दो विधायकों और कुछ निर्दलीय विधायकों की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि यह याचिका बंबई हाई कोर्ट में दायर होनी चाहिए।

कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्यपाल ने सत्तारूढ़ पार्टी को बहुमत साबित करने के लिए 30 नवंबर तक का जो समय दिया है, उसका मतलब कुछ और है। उन्होंने कहा- यह लोकतंत्र के साथ पूरी तरह से धोखा और उसकी हत्या है कि सरकार बनाने की मंजूरी तब दे दी गई जब एनसीपी के 41 विधायक उनके साथ नहीं हैं। सिब्बल ने कहा- अगर देवेंद्र फड़नवीस के पास बहुमत साबित करने के लिए संख्या है तो उन्हें सदन में साबित करने दें वरना हमारे पास सरकार बनाने के लिए संख्या है।

अभिषेक सिंघवी ने कहा कि एनसीपी के 41 विधायक शरद पवार के साथ हैं। सर्वोच्च अदालत ने भी कहा कि इसमें दो राय नहीं है कि शक्ति परीक्षण बहुमत साबित करने का सबसे अच्छा तरीका है। सिंघवी ने इस दौरान उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार की बर्खास्तगी जैसे मामलों का हवाला देते हुए कहा कि सदन में शक्ति परीक्षण ही सर्वश्रेष्ठ है। उन्होंने कर्नाटक मामले में अदालत के 2018 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि शक्ति परीक्षण का आदेश दिया गया था और कोई गुप्त मतदान नहीं हुआ था।

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