राज्यसभा में आयुर्वेद में शिक्षण और अनुसंधान संस्थान विधेयक पारित

नई दिल्ली। राज्यसभा ने आयुर्वेद में शिक्षण और अनुसंधान संस्थान विधेयक को पारित कर दिया है। यह विधेयक तीन आयुर्वेद संस्थानों को एक संस्थान– ‘इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्ड इन आयुर्वेद’ (आयुर्वेद में शिक्षण और अनुसंधान संस्थान) में विलय करने के बारे में है।

विधेयक संस्थान को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करता है। आयुष मंत्री श्रीपद नाइक की अनुपस्थिति में विधेयक को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन द्वारा पेश किया गया। नाइक कोरोना से संक्रमित हैं और उपचार करा रहे हैं।

हर्षवर्धन ने कहा, मंत्रालय देश के विभिन्न हिस्सों में संस्थानों को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दे रहा है और यह मामला यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय को भेजा गया है। मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के 103 संस्थान हैं, लेकिन आयुर्वेद में कोई नहीं था। उन्होंने कहा कि जामनगर संस्थान को चुना गया है क्योंकि यह देश का सबसे पुराना संस्थान है जिसकी स्थापना 1956 में भारत सरकार ने की थी।

टीआरएस, बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट, अन्नाद्रमुक, माकपा, बसपा और अन्य दलों के कई सांसदों ने अन्य राज्यों में भी इसी तरह के संस्थानों की मांग की। सभापति एम. वेंकैया नायडू ने कहा, मंत्री को हर राज्य में ऐसे संस्थानों की मांग को ध्यान में रखकर इस पर विचार करना चाहिए। कांग्रेस नेता एल. हनुमंथिया ने चर्चा के दौरान आपत्ति जताई।

अन्नाद्रमुक सदस्य थंबीदुरई ने विधेयक का समर्थन किया। समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल ने मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे को उठाया और कहा कि कोविड के समय में मानसिक परामर्श की आवश्यकता है। राजद सांसद मनोज झा ने आयुर्वेदिक दवाओं के लिए एक नियामक की मांग की ताकि कोई दुरुपयोग न हो। झा ने रामदेव द्वारा किए गए दावों का हवाला दिया कि उन्होंने कोविड-19 के लिए दवा बनाई है।

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