उद्धव का अब है विरोध

मुंबई। लोकसभा में नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करने के बाद शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अब इसका विरोध कर दिया है। उन्होंने इस विधेयक के बारे में अपना रुख बदलते हुए मंगलवार को कहा कि जब तक सारी चीजें स्पष्ट नहीं हो जाती हैं तब तक शिव सेना बिल का समर्थन नहीं करेगी। गौरतलब है कि शिव सेना ने लोकसभा में इस बिल में संशोधन भी पेश किया था, जिसे खारिज कर दिया गया। उद्धव ठाकरे के रुख बदलने पर तंज करते हुए महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने सवालिया लहजे में कहा कि क्या उद्धव कांग्रेस के दबाव में ऐसा कर रहे हैं।

बहरहाल, मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा- जब तक चीजें स्पष्ट नहीं हो जाती, हम बिल का समर्थन नहीं करेंगे। अगर कोई भी नागरिक इस बिल की वजह से डरा हुआ है तो उनके शक दूर होने चाहिए। वे भी हमारे नागरिक हैं, इसलिए उनके सवालों के भी जवाब दिए जाने चाहिए। लोकसभा में बिल के पास होने से पहले शिव सेना ने इसका विरोध किया था, फिर जब इस सदन में पेश किया गया तो शिव सेना के सांसदों ने इस बिल का समर्थन किया।

लोकसभा में नागरिकता बिल पेश होने से पहले शिव सेना के मुखपत्र सामना में इसकी आलोचना करते हुए सवाल उठाए थे कि क्या हिंदू अवैध शरणार्थियों की चुनिंदा स्वीकृति देश में धार्मिक युद्ध छेड़ने का काम नहीं करेगी और उसने केंद्र पर विधेयक को लेकर हिंदुओं और मुस्लिमों का अदृश्य विभाजन करने का आरोप लगाया था। लेकिन बाद में शिव सेना ने लोकसभा में इस बिल का समर्थन किया।

शिव सेना सांसद अरविंद सावंत ने बिल के समर्थन को सही बताते हुए कहा- हमने राष्ट्रहित के लिए इस बिल का समर्थन किया है। साझा न्यूनतम कार्यक्रम, सीएमपी सिर्फ महाराष्ट्र में लागू है। गौरतलब है कि सावंत शिव सेना के एकमात्र सांसद थे, जो केंद्र सरकार में शामिल थे। लेकिन महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिल कर सरकार बनाने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार से इस्तीफा दे दिया था।

जदयू में नागरिकता बिल पर फूट

नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करती रही जनता दल यू ने लोकसभा में इस बिल का समर्थन किया है। इसे लेकर जदयू के अंदर ही जंग छिड़ गई है। पार्टी के दो बड़े नेताओं ने बिल का समर्थन करने के पार्टी के फैसले पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और नंबर दो नेता प्रशांत किशोर और पूर्व सांसद पवन वर्मा ने बिल का विरोध किया है और इसका समर्थन करने के फैसले पर सवाल उठाया है।

पार्टी उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने ट्विट कर कहा है- इस बिल का समर्थन निराशाजनक है, जो धर्म के आधार पर भेदभाव करता है। यह जदयू के संविधान से मेल नहीं खाता, जिसके पहले पन्ने पर ही तीन बार धर्मनिरपेक्ष लिखा है। हम गांधी की विचारधारा पर चलने वाले लोग हैं। प्रशांत किशोर ने सोमवार को ट्विट करके अपनी पार्टी के फैसले पर सवाल उठाया। उसके एक दिन बाद मंगलवार को पवन वर्मा ने ट्विट करके नीतीश कुमार से अपने फैसले पर फिर से विचार करने और राज्यसभा में बिल का विरोध करने की अपील की।

इससे पहले सोमवार को सदन में हुई चर्चा में जदयू के नेता ललन सिंह ने कहा- हम बिल का समर्थन करते हैं। अगर पाकिस्तान में सताए गए अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता दी जाती है तो यह सही है। यह बिल धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ नहीं है।

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