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संघ-भाजपा ने किया यूपी पर मंथन

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की महामारी को संभालने में नाकामी की चर्चाओं ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की नींद उड़ाई है। तभी संघ और भाजपा के शीर्ष नेताओं और पदाधिकारियों की रविवार को एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर खासतौर से चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से आठ महीने पहले केंद्र और राज्य सरकार दोनों की जैसी बदनामी हुई है, उसने संघ और भाजपा नेतृत्व को चिंता में डाला है।

संघ और भाजपा के नेताओं की बैठक में इस पर विचार हुआ कि किसी तरह से उत्तर प्रदेश में सत्ता बचानी है और उसके लिए छवि सुधारने के साथ सिस्टम को बेहतर करने के लिए तुरंत सक्रियता दिखानी चाहिए। रविवार को हुई इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और उत्तर प्रदेश के संगठन महामंत्री सुनील बंसल भी शामिल हुए। बैठक में छवि और सिस्टम दोनों ठीक करने की रणनीति बनी।

बैठक के बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं बताया गया है कि लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि कोरोना संक्रमण के दौरान ऑक्सीजन की कमी और अस्पतालों में बेड्स की कमी को लेकर जैसा हाहाकार मचा और गंगा नदी में शवों को बहाए जाने की जैसी खबरें आईं, उससे सरकार की छवि बिगड़ी है। सो, पहला प्रयास छवि सुधारने का है ताकि अगले साल के शुरू में होने वाले चुनावों पर इसके असर को कम किया जा सके।

गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण की वजह से उत्तर प्रदेश के तीन मंत्रियों और कई विधायकों की मौत भी हो गई है। पार्टी के कई नेताओं ने अपनी ही सरकार के कामकाज को लेकर नाराजगी जाहिर की है। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने भी एक चिट्ठी लिख कर नाराजगी जाहिर की। ऐसे में संकट प्रबंधन के साथ साथ छवि प्रबंधन की भी बड़ी चिंता हो गई है। इस बीच यूपी को लेकर हुई भाजपा और संघ की बैठक पर कांग्रेस ने निशाना साधा और कहा कि पार्टी महामारी के बीच भी अपने राजनीतिक मकसद को पूरा करने में लग गई।

यूपी सरकार में संभव बड़ा बदलाव

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और संघ पदाधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार में बड़ी फेरबदल होगी और कई मंत्रियों को हटाया जाएगा। आधा दर्जन नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। यह भी कहा जा रहा है कि हाल ही में दिल्ली से भेजे गए आईएएस अधिकारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गुजरात से लेकर दिल्ली तक काम कर चुके एमएलसी एके शर्मा को उप मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।

एके शर्मा रिटायर होने से दो साल पहले वीआरएस लेकर उत्तर प्रदेश जाकर भाजपा में शामिल हुए थे। उनको तत्काल एमएलसी बना दिया गया। वे प्रधानमंत्री के चुनाव क्षेत्र वाराणसी और पूर्वांचल में कोरोना प्रबंधन का काम देख रहे है। बताया जा रहा है कि पूर्वांचल और वाराणसी में शर्मा के कोविड मैनेजमेंट की मोदी ने खुद तारीफ की थी। इसलिए उनको अहम जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा तेज हो गई है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार में पहले से दो उप मुख्यमंत्री- केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा हैं। सो, अब एके शर्मा के रूप में तीसरा उप मुख्यमंत्री बनाया जाए या किसी एक को हटा कर उनकी जगह शर्मा को रखा जाए। अगर दो ही उप मुख्यमंत्री रखने का फैसला होता है तो दिनेश शर्मा को हटाया जाएगा क्योंकि पार्टी को एक गैर यादव पिछड़ा नेता उप मुख्यमंत्री बना कर रखना ही है।

बहरहाल, बताया जा रहा है कि पिछले दो दिन से पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल दिल्ली में हैं। उन्होंने संघ और भाजपा के शीर्ष नेताओं की बैठक में हिस्सा लिया था। उसके बाद सरकार में फेरबदल को लेकर भी चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि पांच या छह नए मंत्री बनाए जा सकते हैं और सात मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार के तीन मंत्रियों का कोरोना से निधन हो चुका है।

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