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अमेरिकी लोकतंत्र पर ट्रंप का कलंक

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘उकसावे’ में उनके हजारों समर्थक बुधवार को अमेरिकी संसद यानी कैपिटल हिल में घुस गए और जनादेश को पलटने का प्रयास किया। ट्रंप के समर्थकों ने जम कर हिंसा की, तोड़-फोड़ की और अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पलोसी के चैंबर में भी घुस गए। कैपिटल इमारत में गुंडागर्दी कर रहे ट्रंप समर्थकों को हटाने के लिए पुलिस को गोलियां चलानी पड़ी, जिसमें चार लोग मारे गए और दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए। अमेरिकी राजनीति की जानकारी रखने वालों का कहना है कि 1814 में ब्रिटिश हमले के बाद पहली बार अमेरिकी संसद पर इस तरह का हमला हुआ है।

ट्रंप के हिंसक समर्थकों के संसद पर हमले की वजह से निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन के चुनाव पर मुहर लगाने की संसद की प्रक्रिया कई घंटे तक बाधित रही। गौरतलब है कि कांग्रेस के दोनों सदनों के सदस्य बुधवार को इलेक्टोरल कॉलेज वोट की गिनती कर रहे थे। इसी दौरान बड़ी संख्या में ट्रंप समर्थक सुरक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करते हुए कैपिटल परिसर में घुस गए। पुलिस को इन प्रदर्शनकारियों को काबू करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। प्रतिनिधि सभा और सीनेट व पूरे कैपिटल को बंद कर दिया गया। उप राष्ट्रपति माइक पेंस और सांसदों को सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया। वाशिंगटन डीसी पुलिस प्रमुख रॉबर्ट कोंटे ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों के कैपिटल परिसर में किए दंगों को शर्मनाक बताया। बिगड़ते हालात के बीच राष्ट्रीय राजधानी वाशिंगटन में कर्फ्यू लगा दिया गया।

अधिकारियों ने ट्रंप समर्थकों के करीब चार घंटे तक की गई हिंसा पर काबू पाने के बाद कहा कि कैपिटल अब सुरक्षित है। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई थी। शांति बहाल होने के बाद कांग्रेस की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। इससे पहले ट्रंप ने एक रैली की थी, जिसमें उन्होंने हार नहीं मानने की बात कही थी। बताया जा रहा है कि इसके बाद ही हिंसा भड़की। तभी उनकी अपनी पार्टी के भी कई नेताओं ने हिंसा के लिए उनको जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि बाद में ट्रंप ने एक वीडियो संदेश में अपने समर्थकों से कानून का पालन करने को कहा।

ट्रंप ने एक वीडियो संदेश में कहा- यह चुनाव धोखाधड़ी भरे थे, लेकिन हम ऐसा कुछ नहीं कर सकते, जिससे खुद को नुकसान पहुंचे और दूसरों को फायदा। हमें शांति चाहिए ही चाहिए। इसलिए घर जाएं। इस बीच राष्ट्रपति चुनाव में धांधली से जुड़े पोस्ट लगातार करने पर ट्विटर ने राष्ट्रपति ट्रंप के अकाउंट पर बुधवार को 12 घंटे के लिए रोक लगा दी और स्थायी रूप से रोक लगाने की चेतावनी दी। फेसबुक ने भी ट्रंप के अकाउंट पर 24 घंटे के लिए रोक लगा दी।

निर्वाचित राष्ट्रपति बाइडन ने इस घटना पर दुख जाहिर करते हुए राष्ट्र के नाम एक संबोधन में कहा- इस समय, हमारे लोकतंत्र पर अप्रत्याक्षित हमला हो रहा है। हमने आधुनिक समय में ऐसा कभी नहीं देखा। स्वतंत्रता के गढ़, कैपिटल पर हमला। लोगों का प्रतिनिधित्व करने वालों और कैपिटल हिल पुलिस…और लोक सेवक जो हमारे गणतंत्र के मंदिर में काम करते हैं उन पर हमला…। उन्होंने कहा- मैं स्पष्ट करना चाहूंगा। कैपिटल में अराजकता का यह दृश्य असल अमेरिका को प्रतिबंबित नहीं करता। हम जो हैं, उसका प्रतिनिधित्व नहीं करता। हम देख रहे हैं, कि थोड़ी सी संख्या में कुछ कट्टरपंथी अराजकता फैला रहे हैं। यह अव्यवस्था है। यह अराजकता है। यह राजद्रोह के समान है। इसका अब अंत होना चाहिए।

बाइडेन की जीत पर लगी मुहर

अमेरिका के नए चुने गए राष्ट्रपति जो बाइडेन की जीत पर औपचारिक मुहर लग गई है और राष्ट्रीय राजधानी में हुई हिंसा के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि 20 जनवरी को सत्ता का हस्तांतरण सहज तरीके से होगा। एक तरह से उन्होंने अपनी हार कबूल कर ली है। इससे पहले अमेरिकी कांग्रेस में बुधवार को इलेक्टोरल कॉलेज के वोटों की गिनती का काम शुरू हुआ पर ट्रंप समर्थकों के हमले की वजह से इसे चार घंटे तक रोकना पड़ा। इस वजह  से अमेरिकी कांग्रेस के साझा सत्र में निर्वाचित राष्ट्रपति बाइडेन और उप राष्ट्रपति कमला हैरिस के चुनाव पर गुरुवार को तड़के कांग्रेस की मुहर लगी।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडन करीब आठ करोड़ वोट के साथ इलेक्टोरल कॉलेज  के 306 वोट हासिल करने में सफल हुए थे। संसद में दो घंटे तक चली सत्यापन की कार्यवाही का सांसदों ने पार्टी लाइन से हट कर समर्थन किया। यहां तक कि सभी सदस्यों ने दो राज्यों- एरिजोना व पेनसिल्वेनिया में चुनाव संबंधी आपत्तियों को भी खारिज कर दिया।

सीनेट ने छह वोट के मुकाबले 93 वोट से एरिजोना के चुनाव नतीजों पर आपत्ति को अस्वीकार किया जबकि प्रतिनिधि सभा ने इसे 121 के मुकाबले 303 मतों से खारिज किया। इसी तरह सीनेट ने पेनसिल्वेनिया के चुनाव नतीजों पर आपत्ति को सात के मुकाबले 93 मतों से अस्वीकार किया जबकि प्रतिनिधि सभा में आपत्ति 138 के मुकाबले 282 मतों से नामंजूर हुई।

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