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ग्लेशियर टूटा, 170 की मौत का अंदेशा

देहरादून। उत्तराखंड एक और भीषण प्राकृतिक आपदा का शिकार हुआ है। रविवार की सुबह राज्य के चमोली जिले के तपोवन में एक ग्लेशियर टूट कर ऋषिगंगा नदी में गिर गया। इसकी वजह से ऋषिगंगा नदी और उसके आगे धौली नदी में अचानक पानी की स्तर बहुत बढ़ गया, जिससे बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। पानी का स्तर अचानक बढ़ने की वजह से ऋषिगंगा पनबिजली परियोजना और एनटीपीसी की पनबिजली परियोजना पूरी तरह से बह गए। ऋषिगंगा परियोजना में करीब 20 लोगों के मारे जाने का अंदेशा है तो एनटीपीसी की परियोजना में करीब डेढ़ सौ लोगों के मारे जाने की आशंका है। देर रात तक 170 लोगों के लापता होने की खबर थी।

पानी की बहाव इतना तेज था कि ज्यादातर लोगों के बह जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। दिन भर चले राहत व बचाव अभियान के बावजूद सिर्फ 10 शव बरामद किए जा सके। मौके पर राहत कार्य के लिए पहुंची इंडो तिब्बत सीमा पुलिस यानी आईटीबीपी की एक टीम ने तपोवन प्रोजेक्ट के पास एक सुरंग में फंसे 16 लोगों की जान बचा कर उनको निकाला। ग्लेशियर टूट कर गिरने से चमोली के पास अलकनंदा नदी का जलस्तर भी बढ़ा है, लेकिन नदी का पाट चौड़ा होने की वजह से बहाव सामान्य हो गया है।

हादसे के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच कर बचाव कार्य कर रही हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस हादसे में मरने वालों के परिवार को चार-चार लाख रुपए की मदद देने का ऐलान किया है। मारे गए लोगों के परिवार को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय आपदा कोष से भी दो-दो लाख रुपए दिए जाएंगे। घायलों को 50 हजार रुपए की मदद दी जाएगी। गौरतलब है कि इससे पहले 2013 में उत्तराखंड के केदारनाथ में इसी तरह की प्राकृतिक आपदा आई थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे।

शुरुआती जांच से पता चला है कि गरमी बढ़ने से ग्लेशियर का निचला हिस्सा पिघल गया, जिससे ग्लेशियर टूट कर नदी में गिर गया। ग्लेशियर टूट कर गिरने से धौली नदी पूरी तरह से उफनने लगी और इसने विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते नदी ने रास्ते में आने वाली हर चीज इसके बहाव में बह गई। ऋषिगंगा पनबिजली परियोजना तक पहुंचते-पहुंचते नदी इतनी विकराल हो गई कि उसने पूरे बांध को ही बहा दिया। मौके पर मौजूद तमाम मशीनरी और लोग इसकी चपेट में आ गए।

घटना के तुरंत बाद प्रशासन ने हरिद्वार तक अलर्ट किया और टिहरी बांध से भागीरथी में पानी का डिस्चार्ज बंद किया गया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत तत्काल मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। वे खुद राहत और बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। हादसे के बाद अलकनंदा और गंगा से किनारे के इलाकों में लोग दहशत में है। इस बीच ऋषिकेश में राफ्टिंग और नावों पर रोक लगा दी गई है। साथ ही श्रीनगर पनबिजली परियोजना के बांध को भी खाली कर दिया गया है, ताकि पीछे से पानी बढ़ने पर बांध का जलस्तर न बढ़े।

यह हादसा सुबह साढ़े 10 बजे के करीब हुआ। ग्लेशियर टूट कर नदी में गिरने से दोनों पनबिजली परियोजनाएं पूरी तरह से तबाह हुई हैं और साथ ही नदी किनारे के गांवों में कई घर बह गए हैं, जिसकी वजह से नदियों के आसपास के गांवों को खाली कराया गया है। जोशीमठ के पास हाईवे पर बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन का बनाया इकलौता पुल भी पानी में बह गया और वहीं पर छह चरवाहे और उनके मवेशी भी पानी में बह गए। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आईटीबीपी की राहत टीमों की मदद के लिए भारतीय सेना ने छह सौ जवान भेजे हैं। इसके अलावा वायु सेना ने एमआई-17 और ध्रुव सहित तीन हेलीकॉप्टर राहत मिशन पर भेजे हैं।

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