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संसद में उठी कानून वापसी की मांग

नई दिल्ली। दो दिन तक इनकार करने के बाद आखिरकार केंद्र सरकार तीन केंद्रीय कृषि कानूनों और किसान आंदोलन पर चर्चा के लिए राजी हो गई। राज्यसभा में बुधवार और गुरुवार दो दिन में 15 घंटे चर्चा होगी। पहले 10 घंटे चर्चा होनी थी। उच्च सदन में नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद ने चर्चा की शुरुआत की। आजाद ने कहा- सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने चाहिए, प्रधानमंत्री खुद यह ऐलान करें तो अच्छा होगा। उन्होंने कहा- अंग्रेजों के जमाने से किसानों का संघर्ष होता रहा है। अंग्रेजों को भी किसानों के आगे झुकना पड़ा। किसान विरोधी कानून वापस लेने पड़े थे।

आजाद ने कहा- 1906 में अंग्रेज हुकूमत ने किसानों के खिलाफ तीन कानून बनाए थे और उनका मालिकाना हक ले लिया था। इसके विरोध में 1907 में सरदार भगत सिंह के भाई अजीत सिंह के नेतृत्व में पंजाब में आंदोलन हुआ और उसे लाला लाजपत राय का भी समर्थन मिला। पूरे पंजाब में प्रदर्शन हुए। उस समय एक अखबार के संपादक बांके दयाल ने ‘पगड़ी संभाल जट्‌टा, पगड़ी संभाल वे’ कविता लिखी जो बाद में क्रांतिकारी गीत बन गया। अंग्रेजों को कानून में कुछ बदलाव करने पड़े। इससे लोग और भड़क गए। बाद में अंग्रेजों ने तीनों कानूनों को वापस लिया।

गुलाम नबी आजाद ने पत्रकारों पर मुकदमे का मुद्दा भी उठाया और कहा कि कुछ वरिष्ठ पत्रकारों व सांसद शशि थरूर के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है, जिसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने इन लोगों पर राजद्रोह का मुकदमा किए जाने पर सवाल करते हुए कहा- जो व्यक्ति विदेश राज्य मंत्री रहा हो, वह देशद्रोही कैसे हो सकता है? आजाद ने 26 जनवरी को लाल किले पर हुई घटना की निंदा भी की। उन्होंने कहा कि लाल किले पर जो कुछ भी हुआ वह लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के खिलाफ है। उन्होंने कहा- जिस जगह से प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हैं, वहां राष्ट्रीय ध्वज का अपमान बरदाश्त नहीं किया जा सकता। लाल किले में हुई हिंसा में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन बेकसूर किसान नेताओं को झूठे मुकदमों में फंसाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

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