Loading... Please wait...

गोडसेः महिमा-मंडन ?

अपना देश भी कितना विचित्र है? कुछ लोग नाथूराम गोडसे की पुण्य तिथि (16 नवंबर) मना रहे हैं और कुछ लोग उसकी याद में मंदिर बना रहे हैं। वे कहते हैं कि वे हिंदू महासभाई हैं और गोडसे भी हिंदूसभाई थे। उनका कहना यह भी है कि देश के 60 प्रतिशत से ज्यादा युवजन गांधी को नहीं, गोडसे को सही मानते हैं। 

पहला प्रश्न तो यही है कि यह 60 प्रतिशत का आंकड़ा वे कहां से लाए? वे यह तर्क दे सकते हैं कि आजकल जिस पार्टी की सरकार है, वह भी मूलतः गोडसेवादी ही है और उसे जनता ने चुना है। क्या उन्हें पता नहीं कि प्रधानमंत्री आजकल गांधी और पटेल की माला इसलिए जपते रहते हैं कि एक तो वे खुद गुजराती हैं और दूसरा उन्हें गुजरात का चुनाव जीतना है और तीसरा, गांधी और पटेल के नाम देश में आज भी दौड़ती हुई गाड़ी की तरह हैं। उन पर कोई भी नेता सेंत-मेंत में सवारी क्यों नहीं करे? 

दूसरा तर्क यह है कि गांधी की हत्या हुई तो हिंदू महासभा के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेताओं को भी गिरफ्तार किया गया था। गोडसे पर वे आज चाहे चुप रहें, लेकिन गोडसे तो उनके दिल में बैठा है। आज देश का बहुमत उनके साथ है। गोडसेवादियों का यह तर्क गलत है। इसलिए कि देश के सिर्फ 31 प्रतिशत (पड़े हुए वोटों के) वोट उन्हें मिले हैं याने 60 प्रतिशत का तर्क बिल्कुल निराधार है। इसके अलावा  यह न भूलें कि अटलजी की अध्यक्षता में भाजपा ने गांधीवादी समाजवाद का नारा दिया था और दीनदयाल शोध संस्थान ने ‘गांधी, लोहिया, दीनदयाल’ पुस्तक भी छापी थी। 

आज भारत और गांधी पर्यायवाची शब्द हैं। गांधी के बिना आधुनिक भारत की कल्पना नहीं की जा सकती, जैसे कि राम और कृष्ण के बिना प्राचीन भारत की कल्पना नहीं हो सकती। आइंस्टीन ने क्या कहा था? उन्होंने कहा था कि आगे आने वाली पीढ़ियां यह विश्वास कैसे करेंगी कि गांधी-जैसा हाड़-मांस का आदमी पृथ्वी पर कभी चला करता था। 

मैं यह नहीं कहता हूं कि हम गांधीजी की अंध-पूजा करें और यह भी नहीं कि उनसे कोई गल्ती नहीं हुई लेकिन उनके हत्यारे को पूजा के योग्य बताना तो शुद्ध मूढ़ता है, हठधर्मिता है बल्कि पागलपन है। 

यह गांधी की ही कृपा और संस्कार है कि ऐसे लोगों को भी भारत में पूर्ण स्वतंत्रता है। क्या अमेरिका की जनता अब्राहम लिंकन और जान एफ. केनेडी के हत्यारों की जन्म या पुण्य-तिथि मनाने वालों को बर्दाश्त करेगी ? क्या पाकिस्तान में लियाकत अली और बेनजीर भुट्टो के हत्यारों के मजारों पर कोई मेले लगा सकता है? गोडसे का महिमा-मंडन करनेवाली हिंदू सभा का हिंदुओं के देश भारत में जो हाल है, वह अपनी कहानी खुद कह रहा है।

Tags: , , , , , , , , , , , ,

151 Views

बताएं अपनी राय!

हिंदी-अंग्रेजी किसी में भी अपना विचार जरूर लिखे- हम हिंदी भाषियों का लिखने-विचारने का स्वभाव छूटता जा रहा है। इसलिए कोशिश करें। आग्रह है फेसबुकट, टिवट पर भी शेयर करें और LIKE करें।

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

आगे यह भी पढ़े

सर्वाधिक पढ़ी जा रही हालिया पोस्ट

मुख मैथुन से पुरुषों में यह गंभीर बीमारी

धूम्रपान करने और कई साथियों के साथ मुख और पढ़ें...

भारत ने नहीं हटाई सेना!

सिक्किम सेक्टर में भारत, चीन और भूटान और पढ़ें...

पाक सेना प्रमुख करेंगे जाधव पर फैसला!

पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय और पढ़ें...

बेटी को लेकर यमुना में कूदा पिता

उत्तर प्रदेश में हमीरपुर शहर के पत्नी और पढ़ें...

© 2016 nayaindia digital pvt.ltd.
Maintained by Netleon Technologies Pvt Ltd