महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाना अच्छा फैसला नहीं: गहलोत

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन

लगाने को अच्छा फैसला नहीं बताये हुए कहा है कि इससे राज्यपाल ने स्थिरता लाने की बजाय अस्थिरता कर दी।

गहलोत नगर निकाय चुनाव के लिए पार्टी के घोषणा पत्र जारी करने के बाद मीडिया से यह बात कही।

उन्होंने एक सवाल पर कहा कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए चर्चा चल रही है

कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना जो भी फैसला करेगी सबको मंजूर होगा, हमारे हाई कमांड के जो प्रतिनिधि है

वह आपस में चर्चा कर रहे हैं और आने वाला वक्त बताएगा क्या फैसला होता है।

पर यह अच्छा फैसला नहीं किया राज्यपाल ने, स्थिरता कायम करने के बजाए अस्थिरता कायम कर दी महाराष्ट्र के अंदर राष्ट्रपति शासन लगाकर।

उन्होंने कहा कि उसमें विधानसभा चुनाव के दौरान किसी पार्टी का स्पष्ट बहुमत नहीं आया तो राज्यपाल का कर्तव्य था

स्थिति कैसे संभल सकती है और किस प्रकार स्थाई सरकार बन सकती है।

उन्होंने राष्ट्रपति शासन लगाकर यह अच्छा फैसला नहीं किया।

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उन्होंने कहा कि इनके शासन के अंदर पूरे देश के अंदर जो इन्होंने घमण्ड से शासन किया है उसमें और क्या उम्मीद कर सकते हैं। सब डरे हुए हैं, टेलीफोन टेप हो रहे हैं बातचीत करेंगे तो पता नहीं क्या होगा, फैसला गलत नहीं हो जाए। राज्यपाल चाहते हुए भी सही फैसला नहीं ले पा रहे हो यह भी हो सकता है।

गहलोत ने कांग्रेस की शिवसेना के साथ विचारधारा को लेकर पूछे सवाल पर कहा कि यह इसीलिए तो कांग्रेस वर्किंग कमेटी में सोनिया गांधी ने इतना समय लगाया, छह-सात घंटे लगाए हैं। बातचीत करने में, क्योंकि ऐसे फैसले अहम फैसले होते हैं जो भविष्य को देखकर किए जाते हैं, हमें कोई सत्ता का लोभ नहीं है पहले भी सत्ता आई है और गई है पर कांग्रेस चाहेगी कि महाराष्ट्र में एक स्थिर सरकार हो, उसके लिए क्या कदम उठाते हैं वह समय बताएगा।

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