महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन

मुंबई/नई दिल्ली। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा और शिव सेना गठबंधन को स्पष्ट बहुमत

मिलने के बावजूद नतीजे के 19 दिन के बाद भी लोकप्रिय सरकार नहीं बन पाई और

राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया।

मंगलवार को सरकार बनाने के सारे विकल्प खत्म होने से पहले ही राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने

राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश भेज दी,

जिसे सरकार ने स्वीकार करते हुए राष्ट्रपति के पास भेज दिया। राष्ट्रपति ने इस सिफारिश की मंजूर कर लिया,

जिसके बाद राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। राष्ट्रपति शासन के दौरान विधानसभा निलंबित रहेगी यानी सरकार बनाने की संभावना कायम है।

इससे पहले राज्यपाल ने शरद पवार की पार्टी एनसीपी को सरकार बनाने के बारे में अपनी राय देने के लिए

मंगलवार की शाम साढ़े आठ बजे तक का समय दिया था।

पर यह समय सीमा खत्म होने से पहले ही राज्यपाल ने अपनी सिफारिश दिल्ली भेज दिया।

बताया जा रहा है कि समय सीमा खत्म होने से पहले एनसीपी ने राज्यपाल से और समय देने की मांग की थी।

इसी वजह से राज्यपाल को यह अंदाजा हो गया कि एनसीपी भी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हैं

और उन्होंने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश भेज दी। राज्य में तीसरी बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ है।

राष्ट्रपति शासन लगाने की पूरी प्रक्रिया हैरान करने वाली जल्दबाजी में हुई।

मंगलवार को दोपहर बाद प्रधानमंत्री को ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए ब्राजील जाना था।

इससे पहले उन्होंने कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई।

तभी अचानक खबर आई कि राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश भेजी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में

इस प्रस्ताव को स्वीकार किया गया और मंजूरी के लिए राष्ट्रपति को भेजा गया।

उधर महाराष्ट्र में एनसीपी से पहले राज्यपाल ने शिव सेना को सरकार बनाने की अपनी मंशा

बताने के लिए 24 घंटे का समय दिया था पर सोमवार की शाम साढ़े सात बजे

जब शिव सेना के नेता राज्यपाल से मिलने गए तो उन्होंने दो दिन और समय देने की मांग की,

जिसे राज्यपाल ने ठुकरा दिया। शिव सेना का कहना है कि राज्यपाल ने अपनी मंशा बताने के लिए

भाजपा को दो दिन का समय दिया था, जबकि उसे सिर्फ एक दिन का समय दिया गया।

बहरहाल, भाजपा, शिव सेना और एनसीपी की ओर से सरकार बनाने का ठोस प्रस्ताव नहीं दिए

जाने के बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने केंद्र को अपनी सिफारिश भेजी। बताया जा रहा है कि

राज्यपाल ने ठोस आधार पर अपनी सिफारिश भेजी है।

पहले माना जा रहा था कि शिव सेना सरकार बनाने के दावे के समर्थन में एनसीपी और कांग्रेस के पत्र सौंपेगी।

पर उसने समर्थन पत्र राज्यपाल को नहीं दिया। शिव सेना के बाद एनसीपी ने भी दावा करने के लिए दो दिन का समय मांगा था।

यह भी साफ दिख रहा है कि कांग्रेस पार्टी कोई भी फैसला नहीं कर पा रही है।

तभी सरकार गठन का ठोस प्रस्ताव नहीं मिलने और विधायकों की खरीद-फरोख्त के अंदेशे को देखते हुए राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश भेजी।

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