कर्नाटक में भाजपा का हुआ बहुमत

बेंगलुरू। कर्नाटक में विधानसभा की 15 सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया है। उसने 12 सीटों पर जीत दर्ज करके राज्य विधानसभा में पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। ऑपरेशन लोट्स के तहत कांग्रेस और जेडीएस से तोड़ कर लाए गए 13 विधायकों को भाजपा ने टिकट दिया था, जिनमें से 11 चुनाव जीत गए हैं। बहरहाल, 15 में से कांग्रेस सिर्फ दो सीटें जीत पाई हैं और एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीता है। ध्यान रहे मई 2018 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने इनमें से 12 सीटें जीती थीं।

उपचुनाव के नतीजों को देखते हुए कांग्रेस ने हार स्वीकार कर ली है। कांग्रसे नेता डीके शिवकुमार ने कहा- जनता ने दलबदलुओं को स्वीकार किया है। विधानसभा चुनाव में इन 15 सीटों में से 12 सीटें जीतने वाली कांग्रेस सिर्फ दो सीटों- हुनासुरु और शिवाजीनगर में ही जीत हासिल कर पाई। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के नेतृत्व वाली जेडीएस ने विधानसभा चुनाव के दौरान इन 15 सीटों में तीन सीटों- केआर पेटे, महालक्ष्मी लेआउट और होंसुर में जीत हासिल की थी।

जेडीएस ने विधानसभा चुनाव में अपने वोट कांग्रेस को ट्रांसफर कराए थे। इसलिए जेडीएस एक भी सीट नहीं जीत पाई। पांच दिसंबर को इन सीटों के लिए मतदान हुआ था। वोटों की गिनती के बाद चुनाव अधिकारी ने बताया कि उपचुनाव में भाजपा ने 15 में से 12 सीटों पर, कांग्रेस ने दो और निर्दलीय ने एक सीट पर जीत दर्ज की। होसकोटे से निर्दलीय उम्मीदवार शरथ बच्चेगौड़ा ने जीत हासिल की।

राज्य की 224 सदस्यों की विधानसभा में बहुमत के लिए भाजपा को 15 सीटों में कम से कम छह सीटों पर जीत की जरूरत थी। दो सीटें- मास्की और आरके नगर अभी भी खाली हैं। भाजपा के पास एक निर्दलीय विधायक के समर्थन से अभी 105 विधायक थे। इसलिए उसे कम से कम छह सीटों पर जीत की जरूरत थी। मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने नतीजों से पहले कहा था कि भाजपा 13 सीटों पर जीतेगी। उनकी बात सही साबित हुई। उनकी पार्टी 12 सीटों पर जीती और पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया।

गौरतलब है कि जुलाई में कांग्रेस और जेडीएस के कुल 17 विधायकों के इस्तीफे के कारण एचडी कुमारस्वामी की गठबंधन सरकार गिर गई थी। इसके बाद बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी थी। इन विधायकों को तत्कालीन स्पीकर ने अयोग्य करार देकर चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर में इन अयोग्य करार दिए गए विधायकों को चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी। वैसे तो विधायकों के इस्तीफे से खाली हुईं कुल 17 सीटों पर चुनाव होना था लेकिन दो सीटों का मामला अदालस में लंबित होने के कारण फिलहाल 15 सीटों पर ही चुनाव हुए थे।

सिद्धरमैया और गुंडूराव का इस्तीफा

कर्नाटक विधानसभा की 15 सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के बुरी तरह से हारने के बाद उसके वरिष्ठ नेताओं ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धरमैया ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफे के ऐलान किया तो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

राज्य में पांच दिसंबर को 15 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुआ था। उपचुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित किए गए, जिसमें कांग्रेस सिर्फ दो सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी। इसे विपक्षी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजे एक पत्र में सिद्धरमैया ने उपचुनावों में संतोषजनक नतीजे नहीं दे पाने के लिए खेद जताया है। उन्होंने लिखा है- मुझे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए सीएलपी के नेता के रूप में पद छोड़ने की आवश्यकता लगती है।

सिद्धरमैया ने पत्रकारों से कहा- विधायक दल के नेता के रूप में लोकतांत्रिक सिद्धांतों को बनाए रखने की जरूरत है। पार्टी के हित में, मैंने सीएलपी नेता के पद से अपना इस्तीफा दे दिया है। उधर, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव ने भी उपचुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

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