महाराष्ट्र में नोटबंदी की बरसी पर धमाकेदार फैसले की उम्मीद

ऋषिराज
मुंबई। महाराष्ट्र में सतह के नीचे बहुत बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम चल रहा है। इसमें भूमिका निभाने वाले लोग मीडिया तक जानकारी नहीं पहुंचने दे रहे हैं। हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे 23 अक्टूबर को घोषित हुए थे, जिसमें एकाध को छोड़कर बाकी सभी भाजपा प्रायोजित एक्जिट पोल गलत निकले। हरियाणा में भाजपा को बहुमत नहीं मिला, फिर भी उसने दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी के साथ तालमेल कर सरकार बना ली। महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना ने संयुक्त रूप से चुनाव लड़ा था और दोनों को बहुमत भी मिला।

288 में से 105 सीटें भाजपा को और शिवसेना को 56 सीटें मिलीं। दोनों पार्टियां मिलकर 161 विधायकों के समर्थन से सरकार बना सकती हैं, लेकिन मामला बुरी तरह अटक गया है। बताया जाता है कि आठ नवंबर को नोटबंदी की बरसी है। आठ नवंबर 2016 की शाम आठ बजे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक झटके में देश में प्रचलित सभी एक हजार और पांच सौ के नोटों को रद्द करने की घोषणा की थी। इससे अच्छी भली चल रही देश की अर्थव्यवस्था में भूकंप आ गया था, जिसका मलबा अब तक समेटा जा रहा है। उसके बाद से अब तक देश की अर्थव्यवस्था रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है। महाराष्ट्र के लोगों को भी नोटबंदी समझ में नहीं आई थी और मुंबई के लोगों को बहुत नुकसान हुआ था।

नोटबंदी के बाद नए नोट आने और मुद्रा प्रवाह के नियमों में एक के बाद एक बदलाव आने से रोज मेहनत करके कमाने-खाने वाले कई लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। तमाम निर्माण कार्य रुके, कारखाने बंद हुए, नकदी के आधार पर चलने वाले कई कारोबार डब्बा हो गए। मुंबई में इसका झटका अभी तक महसूस किया जा रहा है। नोटबंदी के बाद भाजपा का फिर से लोकसभा चुनाव और भी ज्यादा बहुमत से जीतना आश्चर्यजनक था। चुनाव से पहले वायुसेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बम गिरा दिए थे और पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई की तैयारी दिखने लगी थी।

पाकिस्तान से तीन बार भारत की लड़ाई हो चुकी है और पाकिस्तान का विरोध करने के लिए अधिकतर मतदाताओं ने भाजपा का समर्थन कर दिया था। लेकिन दुबारा मोदी सरकार बनने के बाद जो हो रहा है, वह भी सब देख रहे हैं। पहले ही संसद सत्र में सरकार ने ताबड़तोड़ कई विधेयक पारित करवाए, जिनमें तीन तलाक विधेयक शामिल था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर को दो भागों में बांटकर वहां से धारा 370 हटाने का पराक्रम कर दिया। इन सब कीर्तिमानों के बाद महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव हुए थे। मुंबई के कुछ लोग बातचीत में कहते हैं कि आठ नवंबर को नोटबंदी की बरसी पर कोई धमाकेदार खबर आएगी।

एक जानकार ने कहा कि शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के नेताओं ने इसकी रणनीति बना ली है और नौ नवंबर से पहले शिवसेना के मुख्यमंत्री की शपथ ग्रहण का फैसला कर लिया जाएगा। इन तीनों पार्टियों के नेता मीडिया को कोई बयान नहीं दे रहे हैं। अंदाजमार मीडिया तरह-तरह की खबरें फैला रहा है। भाजपा नेताओं की गर्मजोशी हवा हो गई है। एक वरिष्ठ पत्रकार ने फेसबुक पर खबर पोस्ट की है कि दुबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का दावा करने वाले देवेन्द्र फड़नवीस नागपुर में संघ मुख्यालय की शरण में हैं।

भाजपा के प्रमुख रणनीतिकार अमित शाह भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। बैठकें चल रही हैं। शिवसेना और विपक्ष का कोई भी विधायक भाजपा की मदद करता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। घटनाक्रम तेजी से घूम रहा है। बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस नेता अहमद पटेल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मिले। नितिन गडकरी भी नागपुर के हैं और संघ के नजदीकी हैं। वे नोटबंदी के फैसले से असहमत होने वाले गिने-चुने भाजपा नेताओं में से एक थे। महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति में अहमद पटेल का गडकरी से मिलना बड़ी बात है। क्या बाद हुई, यह सामने नहीं आया है।

दूसरी तरफ शिवसेना नेता संजय राउत ने राकांपा प्रमुख शरद पवार के साथ लंबी बैठक की। इन दोनों की बातचीत में क्या रणनीति बनी, इसका खुलासा नहीं हुआ है। इसके बाद कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई संजय राउत से मिलने पहुंचे। शिवसेना की तरफ से सीन में संजय राउत ही हैं। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और उनके पुत्र आदित्य ठाकरे अपनी तरफ से कुछ नहीं बोल रहे हैं। तीनों पार्टियों को रणनीति यही मालूम पड़ रही है कि मीडिया को अनुमान लगाने दिया जाए और मीडिया को जानकारी दिए बगैर बहुमत का पुख्ता प्रबंध करने के बाद नौ नवंबर को विधानसभा की अवधि समाप्त होने से ठीक पहले कोई धमाकेदार फैसला किया जाए। इस तरह आठ नवंबर की शाम तक नोटबंदी की बरसी पर भाजपा को विपक्ष में बैठने का तोहफा देने की तैयारी हो सकती है।

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