सामाजिक कार्यकर्ता से सफल राजनेता बने केजरीवाल

नई दिल्ली। धरना-प्रदर्शन और आंदोलनों के जरिए लोगों के बीच जुझारू व्यक्तित्व की पहचान बनाने वाले आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने वर्ष 2012 के नवंबर माह से अपनी राजनीतिक पारी शुरू की और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा तथा आज तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

केजरीवाल भारतीय राजस्व सेवा की नौकरी छोड़कर सामाजिक कार्यकर्ता बने और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए काफी मेहनत की। सूचना का अधिकार कानून बनाने के लिए उन्होंने कड़ा संघर्ष किया।

सरकार को जनता के हितों के लिए जवाबदेह बनाने के वास्ते बहुत प्रयास किये। उनके प्रयासों और संघर्षों के लिए उन्हें वर्ष 2006 में मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया। केजरीवाल ने वर्ष 2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़े गये प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया और इस आंदोलन के एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरे।

उन्होंने रामलीला मैदान और जंतर-मंतर पर अन्ना हजारे के अनशन पर बैठने जैसे आयोजनों के संचालन आदि में प्रमुख भूमिका निभायी। दो अक्टूबर 2012 को उन्होंने अपनी एक राजनीतिक पार्टी बनाई जिसका नाम आम आदमी पार्टी रखा। सोलह अगस्त 1968 को हरियाणा के सिवानी में जन्मे केजरीवाल ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है।

कुछ दिनों तक इंजीनियर के तौर पर काम करने के बाद उन्होंने त्यागपत्र देकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की तैयारी शुरू कर दी और वह भारतीय राजस्व सेवा के लिए चयनित हुए। वह आयकर विभाग में संयुक्त आयुक्त के पद तक पहुंचे। इसके बाद वह नौकरी से इस्तीफा देकर सामाजिक कार्य में जुट गये।

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