रतन टाटा का स्वभाव, जो ठाना वो कर दिखाया

Source : Social Media

रतन टाटा भारत के सबसे बड़े उद्योगपतियों में से एक हैं। उनके संघर्ष से जुड़ी कई दिलचस्प कहानियां है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

रतन टाटा के बदले की भी एक कहानी है, जो बड़ी दिलचस्प है और एक मिसाल है। यह कहानी जुड़ी है फोर्ड मोटर कंपनी से।

दरअसल, एक बार रतन टाटा को फोर्ड से बेइज्जती सहनी पड़ी थी, तब उन्होंने 9 साल बाद बदला लिया था। क्या है टाटा के बदले की कहानी चलिए आपको बताते हैं।

बात 90 के दशक की है। तब टाटा संस के चेयरमैन रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा मोटर्स ने अपनी कार टाटा इंडिका को लॉन्च किया था।

लेकिन, उस समय टाटा की कारों की सेल नहीं हो रही थी। तब रतन टाटा ने पैसेंजर कार डिवीजन को बेचने का फैसला कर लिया था।

इसके लिए उन्होंने अमेरिकन कार निर्माता कंपनी Ford Motors से बात की, तो कंपनी के चेयरमैन बिल फोर्ड उनका मजाक उड़ाया था।

फोर्ड ने रतन का मजाक उड़ाते हुए कहा कि अगर हम आपके इस बिजनेस को खरीदते हैं, तो ये आपके ऊपर एक एहसान होगा।

बिल फोर्ड की बातें उनके दिलो-दिमाग में घर कर गईं। इस मीटिंग के बाद उन्होंने पैसेंजर कार बिजनेस को बेचने का फैसला टाल दिया।

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