सेलिब्रिटी की जरूरत बनते विज्ञापन

फि ल्मी सितारें हो या क्रिकेटर अथवा किसी अन्य खेल की विशिष्ट हस्ती, विज्ञापनों में चेहरा दिखाना सभी की अनिवार्य जरूरत बन गया है। सिर्फ इसलिए नहीं कि इससे प्रतिष्ठा व लोकप्रियता बढ़ती है बल्कि इसलिए कि अपने मूल कर्म क्षेत्र में खासी मशक्कत करने के बाद जो रकम मिल पाती है उससे कहीं ज्यादा विज्ञापनों में हिस्सा बनने से हंसते खेलते जेब में आ जाती है। महेंद्र सिंह धोनी को ही आम्रपाली के ब्रांड एंबेसडर होने के नाते हर एनडोर्समेंट के लिए आठ करोड़ रुपए मिल रहे थे। उपभोक्तावाद के तेजी से बढ़ने की वजह से शायद ही ऐसा कोई छोटा बड़ा उत्पाद बच पाया है जिसे कोई हस्ती एनडोर्स न कर रही हो। जिन उत्पादों के लिए महंगे सेलिब्रिटी उपलब्ध नहीं हो पाते, उनमें टीवी सितारों से काम चला लिया जाता है। यह चलन पिछले कुछ साल में ही कुछ ज्यादा बढ़ा है। हर सेलिब्रिटी के लिए एनडोर्समेंट करना अतिरिक्त और ज्यादा आय का जरिया बन गया है। इसके लिए उन्हें ज्यादा मशक्कत भी नहीं करनी पड़ती। आकर्षक अनुबंध लाने के लिए कंपनियां हैं। यशराज फिल्म्स की सहायक कंपनी यशराज फिल्म्स टेलेंट रानी मुखर्जी, अनुष्का शर्मा, रणवीर सिंह, अर्जुन कपूर, परिणीति चोपड़ा, सुशांत सिंह राजपूत, आयुष्मान खुराना आदि के लिए एनडोर्समेंट की व्यवस्था करती है। सीएए क्वान के पास तो करीब सौ सेलिब्रिटी की सूची है। क्रिकेटर भी पीछे नहीं हैं।

कार्नरस्ट्रोन मीडिया विराट कोहली, रोहित शर्मा, शिखर धवन आदि का काम देखती है।एनडोर्समेंट से सेलिब्रिटी को कितनी ज्यादा कमाई होती है, इसे शाहरुख खान के उदाहरण से समझा जा सकता है। शाहरुख खान ने कई साल पहले यह बयान देकर सभी को चौंका दिया था कि फिल्मों में काम करने से उन्हें कोई खास कमाई नहीं होती, घर का गुजारा तो शादी ब्याह या स्टेज शो में नाचने और एनडोर्समेंट के जरिए विज्ञापन से होने वाली कमाई से चलता है।एक विज्ञापन का उन्हें सात से दस करोड़ रुपया मिल रहा है और एक विज्ञापन की शूटिंग में अधिकतम तीन दिन लगते हैं। जबकि फिल्म की शूटिंग में कम से कम छह महीने व्यस्त रहना पड़ता है।

सिर्फ एनडोर्समेंट से शाहरुख को एक साल में अस्सी से सौ करोड़ रुपए की आय होने का अनुमान है। ब्रांड एनडोर्समेंट के बाजार में शाहरुख खान का दबदबा पिछले एक दशक से बना हुआ है। हालांकि जहां तक साल भर में एक विज्ञापन के एनडोर्समेंट के लिए सबसे ज्यादा पैसा मांगने की बात है तो आमिर खान काफी आगे हैं। उनकी फीस पंद्रह करोड़ रुपए है। यह कीमत लोकप्रियता से तय होती है।
पिछले कुछ साल में सलमान खान की फिल्में बाक्स आफिस पर रिकार्ड कायम कर रही हैं। 2008 तक सलमान खान की फिल्में लगातार पिट रही थी इसलिए ब्रांड बाजार में उनका भाव उठ नहीं रहा था। खुद सलमान ने भी विज्ञापनबाजी में ज्यादा रुचि नहीं ली। अब वे सक्रिय हुए हैं तो एक ब्रांड को एनडोर्स करने के लिए छह से सात करोड़ रुपए लेकर साल भर में करीब पचास करोड़ रुपए कमा रहे हैं।ऋतिक रोशन की वार्षिक कमाई का आंकड़ा भी यही है। फर्क इतना ही है कि उन्हें एक एनडोर्समेंट के लिए चार से पांच करोड़ रुपए मिलते हैं। अक्षय कुमार कम विज्ञापन करते हैं।

फिर भी एक ब्रांड को एनडोर्स करने के लिए पांच से छह करो़ड़ रुपए वसूल हर साल औसतन करीब तीस करोड़ रुपए कमा लेते हैं। अभिनेत्रियों में कैटरीना कैफ फिलहाल सबसे आगे हैं। साढ़े तीन से चार करोड़ रुपए प्रति एनडोर्समेंट की दर से उनकी सालाना आय 35 करोड़ रुपए मानी जाती है जो फिल्मों से हुई कमाई से तीन गुना ज्यादा है। मुकाबले में करीना कपूर व प्रियंका चोपड़ा भी ज्यादा पीछे नहीं हैं। एक ब्रांड के एनडोर्स के लिए बताया जाता है कि तीन-तीन करोड़ रुपए वसूल कर दोनों हर साल कम से कम तीस-तीस करोड़ रुपए लेती हैं। एनडोर्समेंट की कमाई के लालच ने अजय देवगन, काजोल आदि का भी संकोच तोड़ दिया है। वह अजय देवगन ही थे जिनका एक समय कहना था कि विज्ञापन करना निहायत घटिया दरजे का काम है।

सिर्फ फिल्मी कलाकार ही नहीं क्रिकेट स्टार भी विज्ञापनबाजी से पैसा कमाने में काफी आगे रहे। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल कर या आईपीएल में हिस्सा लेकर सचिन तेंदुलकर व महेंद्र सिंह धोनी ने जितना पैसा पाया, उससे कई गुना ज्यादा उन्होंने ब्रांड को एनडोर्स कर के कमा लिया। इस मद में सचिन तेंदुलकर को 2012 में साठ से सत्तर करोड़ रुपए की आय हुई। उनकी एनडोर्समेंट फीस पांच से छह करोड़ रुपए के बीच झूलती रही। धोनी ने प्रति एनडोर्समेंट आठ से दस करोड़ रुपए की फीस तय कर 80 से सौ करोड़ रुपए की वार्षिक आय का जुगाड़ कर लिया है। एक ‘आम्रपाली’ से नाता तोड़ने से उन्हें कोई फर्क पड़ने वाला नहीं। टैस्ट क्रिकेट की कप्तानी छोड़ने के बावजूद धोनी का भाव नहीं गिरा है।
विराट कोहली इस समय सबसे आगे निकल गए हैं। कहा जाता है कि एक एनडोर्समेंट के लिए उन्हें दस से पंद्रह करोड़ रुपए तक मिल जाते हैं। एक समय बारह ब्रांड को एनडोर्स कर रहे थे। 2017 में कोहली ने जर्मनी की एक कंपनी के साथ आठ साल के लिए सौ करोड़ रुपए का अनुबंध किया था जिसकी वजह से उनकी साल भर की कमाई केवल विज्ञापन से डेढ़ सौ करोड़ रुपए हो गई थी। ब्रांड एनडोर्समेंट बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि लोकप्रियता के उतार-चढ़ाव से ही सेलिब्रिटी का भाव तय होता है। हर कंपनी को भी तो अपना उत्पाद बाजार में चलाने के लिए लोकप्रिय चेहरे का सहारा चाहिए।

बूझते चेहरे पर कोई दांव नहीं लगाना चाहता। सचिन की लोकप्रियता 2012 के उनके खराब प्रदर्शन की वजह से गिरनी शुरू हो गई। और क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उनका बाजार भाव और गिर गया। बढ़ती उम्र के बावजूद शाहरुख, सलमान खान और अक्षय कुमार अपनी मौजूदा लोकप्रियता के बल पर ब्रांड एनडोर्समेंट के बाजार में टिके हुए हैं, हालांकि विज्ञापनों की संख्या के मामले में अमिताभ बच्चन को कोई टक्कर देने की स्थिति में नहीं है। एक समय रणबीर कपूर से ज्यादा बेहतर स्थिति में आने की उम्मीद कर ली गई थी। कम समय में हर तरह की भूमिका एंकर ने की वजह से बेहद सराहे जा रहे रणबीर की मार्केट वैल्यू 2012 में गजब की रही।

करिअर की शुरुआत से ही ब्रांड एनडोर्स करने में विशेष रूचि दिखाने का उन्हें यह फायदा हुआ कि 2012 में हर एनडोर्समेंट के लिए चार में पांच करो़ड़ रुपए वसूल कर उन्होंने 65 करोड़ रुपए जुटा लिए। लेकिन लगातार चार फिल्में पिटने की वजह से उनकी स्थिति कमजोर हुई है। उनकी जगह अब रणबीर सिंह ने ले ली है। कंपनियां और ब्रांड एनडोर्समेंट एजंसियों की रूचि अब नए और युवा वर्ग में लोकप्रिय चेहरों पर दाव लगाने में ज्यादा बढ़ रही है। कुछ साल पहले आम के स्वाद वाले शीतलपेय माजा के लिए इमरानखान और परिणीति चोपड़ा को चुनने की वजह बताई गई कि दोनों आज के युवाभारत की सही तस्वीर हैं, वे ऊर्जावान हैं, आत्मविश्वासी हैं और पारंपरिक व्यवस्था को बदल देना चाहते हैं। पिछले कुछ समय में वरुण धवन, आलिया भट्ट, अर्जुन कपूर, श्रद्धा कपूर, सुशांत सिंह राजपूत और युवा फिल्मी चेहरे विज्ञापनों में दिख रहे हैं। वजह व्यावसायिक है। उन्हें स्थापित सितारों जितना पैसा नहीं देना पड़ता और उनकी उपस्थिति ताजगी का अहसास तो कराती ही है।

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