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लिंगानुपात में अति सवंदेनशील जिलों में दस राजस्थान के भी

जयपुर। बालिका लिंगानुपात अति सवंदेनशील जिलों में देश के 850 में से 10 जिले राजस्थान के भी शामिल है। भारतीय जनता पार्टी के ''बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं'' प्रकल्प के राष्ट्रीय संयोजक डाॅ़ राजेन्द्र फडके ने आज यहां प्रकल्प की प्रदेश स्तरीय बैठक में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लिंगानुपात में व्याप्त इस स्थिति पर निंयत्रण पाने के लिये प्रकल्प द्वारा बेटी बचाओं बेटी पढाओं के अभियान का ग्राम एवं मंडल स्तर पर विस्तार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बालिका लिंगानुपात में अति संवेदनशील क्षेत्र में शामिल है इन जिलों पर विशेष ध्यान दिया जायेगा और इसके लिये संगठन की ओर से प्रभारी बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य लक्ष्य प्रदेश में बालिका लिंगानुपात बढ़ाने, साक्षरता दर बढ़ाने, विद्यालय में बालिकाओं की प्रवेश दर को बढ़ाने तथा विद्यालयों में ड्राप आउट की बालिका दर को न्यूनतम स्तर पर लाने पर जोर दिया जायेगा । उन्होंने कहा कि प्रकल्प द्वारा पार्टी के सभी कार्यक्रमों में कन्या पूजन किए जाने जैसे काम हाथ में लिए गए हैं। 
इसके लिये हाल ही में राजस्थान के बीकानेर एवं जोधपुर में संभाग स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई है और आगामी अक्टूबर माह में प्रदेश में जिला मंडल स्तरीय कार्यकर्ताओं को बुलाकर प्रदेशस्तरीय बड़ा सम्मेलन आयोजन किया जायगा।
भाजपा प्रदेश महामंत्री भजनलाल शर्मा ने बताया कि पार्टी द्वारा अभी जुलाई माह में बालिकाओं के नूतन प्रवेश पर उत्सव बनाकर कार्यक्रम किए गए हैं तथा आध्यात्मिक संतों के सहयोग से ''बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं'' के प्रतिज्ञा कार्यक्रम भी आयोजित किए गए है।
प्रकल्प की प्रदेश संयोजक डॉ. मीना आसोपा ने कहा कि अभियान से पूर्व राजस्थान प्रदेश में बालिका लिंगानुपात 888 प्रति हजार था जो अब बढ़कर 939 तक पहुंच गया है। इसी प्रकार बालिकाओं की दर विद्यालय में भी 75 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में लड़कियों के विद्यालय छोड़ने की दर में आशातीत कमी देखी गई है। इसके कारण राज्य एवं केन्द्र सरकार द्वारा नारी स:शक्तिकरण के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं जैसे मुख्यमंत्री राजश्री योजना, भामाशाह योजना, नन्दघर योजना, सुकन्या योजना तथा प्रधानमंत्री सुकन्या समृद्धि योजना, उज्जवला योजना, सुरक्षित मातृत्व अवकाश तथा जनधन योजनाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
इससे पूर्व प्रकल्प की आयोजित बैठक में लिंगानुपात के संवेदनशील राजस्थान के दस जिलों के प्रभारी बनाए गए। इन जिलो के प्रभारियों का क्षेत्रों में दो दिवसीय आवासीय प्रवास तय किए गए है । बैठक में एनजीओ, चिकित्सा तथा सोशल, प्रिंट एवं इलेक्ट्रोनिक मीडिया का सदुपयोग ''बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं'' अभियान में किए जाने के निर्णय लिया गया।

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