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स्वयं सहायता समूहों से महिलायें बनी आत्मनिर्भर

लखनऊ। विश्व बैंक के प्रतिनिधि और को-टास्क टीम लीडर रज्जन समान्तरे और एग्री विजनेस विशेषज्ञ चाकिबजेने ने आयोजित प्रदर्शनी का आज यहां अवलोकन किया। 
उत्तर प्रदेश भूमि सुधार निगम के गोमतीनगर स्थित मुख्यालय पर आयोजित प्रदर्शनी में भूमि सुधार निगम की सोडिक तृतीय परियोजना के तहत बनाये गये महिला स्वयं सहायता समूह की बेवीनाज और सोकिया बानो ने विश्व बैंक प्रतिनिधियों को बताया कि स्वयं सहायता समूह से उन्हें चार से पांच हजार रुपये की प्रतिमाह आमदनी हो रही है। 
बेवीनाज और सोकिया बानो ने बताया कि मलिहाबाद लखनऊ के ग्राम जमोलिया में उन्होंने शिवभोला महिला समूह गठित किया था, जिसमें 11 महिलाओं को जोड़कर उन्हें जरदोजी का प्रशिक्षण दिया अब इस कार्य से सभी को प्रतिमाह अच्छी आमदनी हो रही है। उन्होंने कहा कि भूमि सुधार निगम द्वारा आजीविका सहयोग के रूप में 65,000 रुपये की सहायता दी गयी है। 
विश्व बैंक के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शनी जरदोजी, सिलाई, मिठाई के डिब्बे बनाने के कार्य का अवलोकन किया और उनके कार्यों की सराहना की। प्रदर्शनी में ग्राम भौदरी, मोहनलालगंज, लखनऊ के शिवम महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा सिलाई करके महिलाओं के लिए उच्च गुणवत्ता के डिजायनर वस्त्रों को बनाकर दिखाया गया। शिवम महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष सुमन और कोषाध्यक्ष रमीला ने विश्व बैंक प्रतिनिधियों को बताया कि निगम द्वारा उन्हें इस कार्य के लिए 20,000 रुपये की सहायता दी गयी है। अब उनके समूह के सभी सदस्य 300 से 400 रुपये प्रतिदिन कमा रहे हैं। 
प्रदर्शनी में आयी सहारा महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष सुनीता और सदस्य संगीता, मिठाई के डिब्बे बनाने का कार्य कर रही है। इसके लिए उनके समूह को 20,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी गयी है। इनके द्वारा तैयार डिब्बों की स्थानीय दुकानदारों के यहाँ खूब माँग है। अपने इस व्यवसाय से उनका समूह महीने में 25 से 30 हजार रुपये कमा लेता है। 
उ0प्र0 भूमि सुधार निगम के प्रबन्ध निदेशक अजय यादव ने बताया कि निगम के परियोजना क्षेत्र के 32 जिलों में लगभग 600 महिला स्वयं सहायता समूह गठित किये गये हैं जिन्हें विभिन्न आय जनित गतिविधियाँ जैसे, बकरी पालन, सिलाई कढ़ाई, मिठाई के डिब्बों, पेपर दोना व सब्जी की खेती मसाला पैकिंग, दलिया और बेसन बनाना जैसे कार्यों के लिए प्रशिक्षण एवं आर्थिक सहायता दी जा रही है। निगम के इस सहयोग से महिलाएं आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त हुई हैं। 
निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक डा. एस0के0 सिंह ने बताया कि निगम ने सोडिक तृतीय परियोजना के तहत कृषकों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 101 प्रोड्यूसर कम्पनियों का गठन किया है। कृषक उत्पादक कम्पनियां कृषकों के लिए निवेश की व्यवस्था, कृषक हायरिंग सेन्टर से कृषि यंत्रो और ट्रैक्टर उपलब्ध कराने तथा कृषकों की उपज को एक साथ उचित मूल्य पर बिक्री की व्यवस्था कर रही है। इस कार्य के लिए इन्हें इफ्को से मान्यता मिली हुई है। 

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