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यथार्थ से टकराती कथाएं

New Delhi, Apr 16 (ANI): Prime Minister Narendra Modi speaks in Lok Sabha during the Budget Session (2026-27) of Parliament, in New Delhi on Thursday. (Sansad TV/ANI Video Grab)

हकीकत से कटे नैरेटिव्स का अपना जीवनकाल होता है। जब उनका सामना विपरीत होते जमीनी हालात से होता है, तो उनमें दरारें पड़ने लगती हैं। ज़ेन-ज़ी का तेवर उन्हीं हालात का नतीजा है।

भारत का राजनीतिक विमर्श काफी पहले शालीनता की हदें तोड़ चुका है, इसलिए इसमें नए अपशब्दों के जुड़ने पर शायद ही किसी को एतराज होता है। तीखे ध्रुवीकरण की मौजूदा सूरत में किसी नेता की टिप्पणियों को गरिमा-विहीन या मर्यादा के खिलाफ बता कर उसे घेरने की रणनीति का विरोधी खेमों पर अब कोई असर नहीं होता। कई वर्षों तक इस नई स्थिति का लाभ भाजपा ने उठाया। भाजपा नेताओं को लेकर कुछ हलकों से तब भी ऐसे शब्द बोले जाते थे, लेकिन तब कथानक पर भाजपा इकॉ-सिस्टम का इतना दबदबा था, वे शब्द बोलने वाले को ही भारी पड़ जाते थे। लेकिन यह बदले माहौल का ही संकेत है कि ऐसे लफ्ज़ अब जनमत के एक बड़े हिस्से में नया राजनीतिक कथानक गढ़ने का काम करने लगे हैं।

भाजपा काफी समय तक विपक्षी नेताओं को प्रहसन-पात्र के रूप में पेश सियासी फायदे उठाती रही, मगर अब सोशल मीडिया- खासकर रील्स के इस्तेमाल से वैसी ही छवि उनके शीर्ष नेताओं को पेश की जा रही है, जिसे एक बड़ा श्रोता वर्ग मिल रहा है। बेशक, यह स्थिति लाने में ज़ेन-ज़ी के आंदोलनों ने बड़ी भूमिका निभाई है। भाजपा के सामने सवाल खड़ा है कि कहानी ऐसे क्यों पलटने लगी है? वे आत्म-मंथन करें, तो शायद उन्हें आभास होगा कि यथार्थ से कटे कथानकों का अपना जीवनकाल होता है। जब उनका सामना विपरीत होते जमीनी हालात से होता है, तो उनमें दरारें पड़ने लगती हैं।

ज़ेन-ज़ी का तेवर उन्हीं हालात का नतीजा है। हिंदुत्व की पहचान के साथ ‘विश्व गुरु’ की हैसियत दिलाने के वादों से वह छली गई महसूस कर रही है, तो उसकी वजहें हैं। ये पीढ़ी ‘मेक इन इंडिया’, ‘नया भारत’, ‘देश बदल रहा है’, ‘अमृत काल’, ‘विकसित भारत’ जैसे नारों को सुनते हुए जब बड़ी हुई, तो उसने पाया कि असल में उसके पास आगे बढ़ने के पहले जितने अवसर भी उपलब्ध नहीं हैं। तो वह हिसाब मांग रही है। इसका जवाब ‘सप्तधारा’ जैसे नए नैटेरिव गढ़ कर नहीं दिया जा सकता। ना ही ‘दिमागी नक्सलियों’ को अलग-थलग करने जैसे एलान नई परिस्थितियों में अपेक्षित भय पैदा कर सकेंगे।

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