dimagi Naxals

  • यथार्थ से टकराती कथाएं

    हकीकत से कटे नैरेटिव्स का अपना जीवनकाल होता है। जब उनका सामना विपरीत होते जमीनी हालात से होता है, तो उनमें दरारें पड़ने लगती हैं। ज़ेन-ज़ी का तेवर उन्हीं हालात का नतीजा है। भारत का राजनीतिक विमर्श काफी पहले शालीनता की हदें तोड़ चुका है, इसलिए इसमें नए अपशब्दों के जुड़ने पर शायद ही किसी को एतराज होता है। तीखे ध्रुवीकरण की मौजूदा सूरत में किसी नेता की टिप्पणियों को गरिमा-विहीन या मर्यादा के खिलाफ बता कर उसे घेरने की रणनीति का विरोधी खेमों पर अब कोई असर नहीं होता। कई वर्षों तक इस नई स्थिति का लाभ भाजपा ने...