अमीर ‘नॉर्मल’ और गरीब ‘रामभरोसे’!

अमीर देशों में सबसे ज्यादा खौफ, सबसे ज्यादा मौतें हुईं तो सबसे पहले वे महामारी के बीच में ‘नॉर्मल’ होते हुए, आगे बढ़ रहे हैं।

‘नॉर्मल’ दुनिया और भारत

सितंबर 2020 और सितंबर 2021 का फर्क है कि संयुक्त राष्ट्र की महासभा के भाषण में राष्ट्रपति बाइडेन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग ने जलवायु संकट पर फोकस किया न कि महामारी पर।

सनातनी हिंदू का कनाडा अनुभव

कनाडा में हिंदुओं का वह रूतबा नहीं रहा जो 2014 से पहले था। क्यों? पहली बात जैसे भारत में हुआ वैसा ही कनाडा में हुआ।

जो डिस्मैंटलिंग चाहते वहीं तो ‘हिंदुत्व’ निर्माता!

सनातन धर्म याकि हिंदू समाज दो पाटों में पीस रहा है! एक पाट उन सेकुलर-वामपंथियों का है, जिन्होंने गोधरा कांड के बाद नरेंद्र मोदी को खलनायक करार दे कर उन्हें हिंदुओं में महानायक बनवाया।

मोदी राज की ‘हिंदुत्व’ स्टोरी!

कोई यदि हिंदुत्व को तालिबानी करार भी दे रहा है तो संघ परिवार को यह धन्यवाद करना चाहिए जो हिंदू शब्द का सात वर्षों में ऐसा ‘हिंदुत्वी’ कायाकल्प हुआ!

डिस्मैंटलिंग हिंदुत्वः हे राम! मोदी उपलब्धि या…

‘डिस्मैंटलिंग हिंदुत्व’ का? इस बात पर ‘नया इंडिया’ में बलबीर पुंज और शंकर शरण के लेख व मीडिया के लब्बोलुआब में समझने वाला पहला सवाल है कि क्या हम हिंदू दुनिया में बदनाम हो गए हैं?

गिलानीः घाटी में पाक का हीरो!

गिलानी का दो टूक कहना होता था- इस्लाम के ताल्लुक से, इस्लाम की मोहब्बत से, हम पाकिस्तानी हैं और पाकिस्तान हमारा है!

खतरा! अमेरिका, नाटो के बिना दक्षिण एशिया

सन् 2021 की 31 अगस्त की तारीख दक्षिण एशिया और खासकर भारत के लिए निर्णायक मोड़ है। अमेरिका और नाटो देशों की सेनाओं का अफगानिस्तान से लौटना पश्चिमी सभ्यता का वह फैसला हैI

इस्लाम से लड़े बिना नियति घायल!

यह शीर्षक अटपटा लगेगा। सोच सकते हैं अमेरिका लड़ कर ही तो घायल है। लेकिन अमेरिका ने इस्लाम से लड़ाई कहां बताई है? अमेरिका अपने को इस्लाम से लड़ता हुआ नहीं बताता है।

इस्लाम का सत्य और चीन की बर्बरता!

पौने दो अरब मुसलमानों में अधिकांश मन ही मन तालिबान की जीत और अमेरिका की हार से सुकून में हैं तो वह क्या इस्लाम का सुकून नहीं?

जंगली ही खोदते हैं सभ्यताओं की कब्र!

चट्टान जैसी अटल सभ्यताएं और विशाल साम्राज्य कैसे खानाबदोश घुड़सवारों की बर्बरता से खत्म हुए, इसकी दास्तां इतिहास में भरी हुई है।

आंतक से लड़ना बिना आंतक के बीज को मिटाए!

इस्लाम की यह जिद्द, यह प्रतिस्पर्धा स्थाई है कि उसके पैगंबर ही आखिरी ईश्वर अवतार है और उनकी आसमानी किताब, कुरानशरीफ के अनुसार उसे दुनिया बनानी है।

अमेरिका की 75 साला गलती!

दूसरे महायुद्ध के बाद 1945 से दुनिया की एकमेव स्थायी महाशक्ति अमेरिका (पश्चिमी सभ्यता) ने 75 सालों में जितना धोखा इस्लाम से खाया है, वह उससे जितना घायल हुआ है वैसा किसी से नहीं!

घाटी है सवालों की बेताल पचीसी!

विचार जरूरी है कि 75 सालों में ताकत के बावजूद घाटी को भारत अनुकूल बनाने के लिए वहां मुस्लिम मनोदशा क्यों नहीं बदल पाए?

नब्बे का वैश्विक दबाव और नरसिंह राव

कश्मीर घाटी पर भारत और पाकिस्तान के इरादों में शक्ति परीक्षण का निर्णायक वक्त 1990 व उसका दशक था। जनवरी-फरवरी 1990 में घाटी पूरी तरह अराजक थी।

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