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Monday, April 19, 2021
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हरिशंकर व्यास कॉलम

न बीमारी रुकेगी, न बरबादी और न मौतें!

इसलिए कि वायरस भला अंधेर नगरी, चौपट राजाकी भीड़ का मौका क्यों चूके? इस पृथ्वी के साढे सात अरब...

दुनिया सचमुच देख रही हमें!

दुनिया भर के देशों ने कोरोना वायरस के संक्रमण को जब गंभीरता से लिया, उसके तीन-चार महीने बाद भारत...

कोरोना कभी खत्म भी होगा या नहीं?

लाख टके का सवाल है कि कोरोना वायरस का प्रकोप कभी खत्म भी होगा या नहीं? पिछले साल अक्टूबर...

डा. वेदप्रताप वैदिक कॉलम

कोरोना और कुंभ-स्नान

यह प्रसन्नता की बात है कि हरिद्वार में चल रहे कुंभ-मेले को स्थगित किया जा रहा है। यहाँ पहले...

राजनीतिः सेवा नहीं, मेवा है

देश के सिर्फ पांच राज्यों में आजकल चुनाव हो रहे हैं। ये पांच राज्य न तो सबसे बड़े हैं...

अजीत द्विवेदी कॉलम

मानवता या मुनाफा?

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के सामने ये अहम सवाल मौजूद है कि वे अपने देश की कंपनियों के...

आज का लेख

बहुत सही कहा अनमोल अंबानी ने!

अब तक राजीव बजाज यह कहते रहे थे कि लॉकडाउन बिना सोचे-समझे किया गया एक गलत फैसला था, जिसने...
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राजरंग

किसानों से बात करे सरकार

केंद्र सरकार को अपने बनाए कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के प्रति दुश्मनी का भाव छोड़ देना चाहिए...

ताज़ा खबर

राजस्थान में 3 मई तक कर्फ्यू, इन दफ्तरों को छोड़ ये सब कार्यालय बंद, जानें क्या रहेगा खुला और क्या रहेगा बंद

ज्यपुर। Curfew in Rajasthan : राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने लंबे मंथन के बाद आखिरकार राजस्थान में कोरोना संक्रमण की चुनौती...

हरिशंकर व्यास कॉलम

चीन की मजबूरी हिटलरी विस्तार

भविष्य में चीन से अनिवार्य संकट-4: चीन फैक्टरी है दुनिया की। पृथ्वी के लोगों की जरूरतों का आपूर्तिकर्ता है।...

न बीमारी रुकेगी, न बरबादी और न मौतें!

इसलिए कि वायरस भला अंधेर नगरी, चौपट राजाकी भीड़ का मौका क्यों चूके? इस पृथ्वी के साढे सात अरब...

जिंदगीनामा ठहरा, ठिठका!

 ‘पंडित का जिंदगीनामा’ लिखना कोई साढ़े तीन महिने स्थगित रहा। ऐसा होना नहीं चाहिए था। आखिर जब मौत हवा में व्याप्त है तो जिंदगी पर  सोचना अधिक हो जाता है। तब स्मृति, आस्था, जिंदगी के गुजरे वक्त की याद ज्यादा कुनबुनाती है।

महामारी में ‘मृत्यु’ ही है विषय!

अच्छा नहीं लगा, एक पुण्यात्मा की स्मृति में चंद लोगों को देख कर। वजह? शायद महामारी काल! मतलब मृत्यु काल! वक्त का यह रूप सभी सभ्यताओं में मौत का प्रतिबिंब है।

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