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नमस्कार, मैं हरिशंकर व्यास, 21वीं सदी के पहले 25 वर्षों में एक तरफ दुनिया भर के तमाम देशों और उसमें रह रहे लोगों और समाज ने न जाने कितने मुकाम हासिल किए लेकिन इसी दौरान भारत भीड़, झूठ, प्रपंच, अंधभक्ति और बाजार का पर्याय नजर आया…कॉलम अपन तो कहेंगे में इस बार मेरे विचार का शीर्षक है 25 वर्षों का भारत चिट्ठा
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