मानव अंतः पशुओं सा या इंसानी?

पृथ्वी की समस्या मनुष्य है। उससे पृथ्वी को बचाना है। तब मनुष्य को बदलना होगा। बदलना तब संभव है जब मनुष्य पांच हजार वर्षों में बनी आदतों को छोड़े।

टूक निष्कर्ष, पर गले नहीं उतरता!

पृथ्वी की समस्या मनुष्य है। मनुष्य की समस्या खुद मनुष्य है! मतलब हर तरह की समस्याओं का जड़ कारण मानव स्वभाव है।

बिना सभ्य हुए ज्ञानी!

जबकि मनुष्य और समाज के बिना सभ्य और सुसंस्कृत हुए पृथ्वी की समस्याओं का समाधान संभव ही नहीं है।

‘सभ्यता’ में ‘असभ्य’ मनुष्य नियति!

सवाल है इससे मनुष्य का क्या हुआ? क्या मनुष्य सभ्य और समझदार हुआ? सभ्यता ने मनुष्य को सिविलाइज्ड और विजडम से भरा-पूरा बनाया?

पहली सभ्यताः हाइब्रिड फाउंडेशन!

मनुष्य समाज दरअसल पशु प्रवृत्तियों और मनुष्य व्यवहार की वह वर्णसंकर, हाईब्रिड प्रजाति है, जिससे मानव दिमाग एक छोर से दूसरे छोर, जंगली से मानवीय छोर में झूलता है।

सुमेर से शुरू मकड़जाल!

सुमेर की पहली सभ्यता में मनुष्य का सभ्यता नाम की आर्टिफिशियल जिंदगी में बंधना शुरू हुआ। तब बना मकड़जाल वर्तमान के सभी 195 देशों की सच्चाई है।

सभ्यता, ओझाई अतिशयता!

धारणा सही नहीं है कि बस्ती बसना और खेती साथ-साथ घटित घटनाएं हैं। यह भी फालतू बात है कि इन दोनों से फिर सभ्यता निर्माण आरंभ हुआ।

सभ्यता है छलावा!

सभ्यता से पहले इंसान सचमुच सहज-सरल स्वभाव का प्राणी था। जबकि सभ्यता के बाद?

भय, अहंकार और त्रिभुज

मनुष्य अपने को दोषी कैसे समझे? उसकी बुद्धि का तो समाज, धर्म व राजनीति के त्रिभुज से हरण है। हर मनुष्य त्रिभुज की ओपन जेल का बेसुध प्राणी है।

पिंजरा, खुली जेल, कैदी मनुष्य!

यक्ष प्रश्न है मनुष्य ने अपने को क्या बनाया? मनुष्य बुद्धि ने कमाल किया, उससे मानव विकास हुआ लेकिन खुद बुद्धि का क्या बना? वह पराधीन हुई!

धर्मः झगड़ों की विरासत

धर्म वह चुंबक है जो लोगों को खींचे रहता है। उन्हें बांधता है। धर्म व्यक्ति और देश के दिमाग में अनुभूतियों से परे जीवन का ख्याल बनवाता है।

पत्थर, लाठी, पॉवर!

पत्थर मतलब मनुष्य का पहला औजार! पहला मनुष्य हथियार। वह पत्थर अब पॉवर है! पाषाण युग में मनुष्य ने पत्थर से जंगल में विजय पाई थी।

‘मैं’ और मेरा मालिकाना!

आधुनिक मानव का पृथ्वी के साथ क्या व्यवहार है? मानों वह उसका मालिक हो! वह भगवानजी से अपने नाम पर पृथ्वी का पट्टा लिखवा कर लाया हो!

सब बातों का एक सच, आइडिया!

मनुष्य और मानव सभ्यता का पहला सत्व है दिमाग की जिज्ञासा, ख्याल, भाव और आइडिया। चाहें तो इसे मनुष्य अस्तित्व की बुद्धि-विचार-सत्य की गंगोत्री कहें या त्रिवेणी!

जैसे आठ साल वैसे 10, 15 या 20 साल

कुछ भी नहीं बदलेगा क्योंकि भारत आज जिस दशा में है वह सिर्फ परिस्थितियों के कारण नहीं है, बल्कि सोच-समझ कर किए गए फैसलों की वजह से है।

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