धर्मः झगड़ों की विरासत

धर्म वह चुंबक है जो लोगों को खींचे रहता है। उन्हें बांधता है। धर्म व्यक्ति और देश के दिमाग में अनुभूतियों से परे जीवन का ख्याल बनवाता है।

पत्थर, लाठी, पॉवर!

पत्थर मतलब मनुष्य का पहला औजार! पहला मनुष्य हथियार। वह पत्थर अब पॉवर है! पाषाण युग में मनुष्य ने पत्थर से जंगल में विजय पाई थी।

‘मैं’ और मेरा मालिकाना!

आधुनिक मानव का पृथ्वी के साथ क्या व्यवहार है? मानों वह उसका मालिक हो! वह भगवानजी से अपने नाम पर पृथ्वी का पट्टा लिखवा कर लाया हो!

सब बातों का एक सच, आइडिया!

मनुष्य और मानव सभ्यता का पहला सत्व है दिमाग की जिज्ञासा, ख्याल, भाव और आइडिया। चाहें तो इसे मनुष्य अस्तित्व की बुद्धि-विचार-सत्य की गंगोत्री कहें या त्रिवेणी!

जैसे आठ साल वैसे 10, 15 या 20 साल

कुछ भी नहीं बदलेगा क्योंकि भारत आज जिस दशा में है वह सिर्फ परिस्थितियों के कारण नहीं है, बल्कि सोच-समझ कर किए गए फैसलों की वजह से है।

इतिहास बोधः वर्तमान को अतीत में जीना

पृथ्वी के इतिहास में मनुष्य जन्म है। उस नाते जन्मदायी पृथ्वी पर मानव इतिहास में क्या बोध है? क्या मनुष्य अपने इतिहास में पृथ्वी की चिंता करता हुआ है?

इतिहास

इतिहास मनुष्य का सत्य है। उसकी पशुताओं का दो टूक सत्य। कैसे? आम मान्यता है कि मनुष्य का होना, उसकी पहचान दिमाग है।

मनुष्य हाल-फिलहाल समर्थ नहीं!

पृथ्वी को बचाने का मानव संसाधन कहां है? वह कितना समर्थ और समझदार है? क्या संभव है जो चंद ज्ञानी-विज्ञानी-सत्यवादी देवर्षियों के सामर्थ्य से पृथ्वी बच जाए?

मनुष्यः स्वार्थी, यांत्रिक व्यवहार!

लोग क्या जलवायु परिवर्तन, पृथ्वी की चिंता कर सकते हैं? अपना व्यवहार बदलेंगे? असंभव है। … मनुष्य स्वकेंद्रित स्वार्थी है न कि रेशनल।

बुद्धि नहीं, गड़ेरिए मालिक!

व्यक्ति बुद्धि चेतना से मानव है। बुद्धि पशुओं से उसकी पृथकता है। वहीं मनुष्य की जन्मदाता है। जिंदगी का कारण है। उसे प्राप्त आशीर्वाद है।

ब्रह्म, ज्ञान और देवर्षि

मनुष्य और उसकी सभ्यता व इतिहास के चार खंभें हैं। पंख, औजार, लाठी और पिंजरा! हां, ये चार शब्द मानव विकास, क्रमिक इवोल्यूशन का कारण हैं।

मनुष्य का किंगडम एनिमेलिया!

यूक्रेन, सीरिया या महायुद्ध की बरबादियों के फोटो, यातनाओं के गुलग्स, कंसन्ट्रेशन कैंप, ऑस्चविट्ज, होलोकास्ट, 9/11 जैसे अनुभव व तारीखें क्या भुला सकते हैं?

पहले पशु, तब मनुष्य!

कल्पना करें अंतरिक्ष में कही कोई जीव टेलिस्कोप से पृथ्वी को देंखे तो धरातल पर पशुओं और आठ अरब लोगों की भिन्नता क्या बायोमास में दिखेगी?

मानव बुद्धिः पहले पंख…फिर पिंजरे!

सवाल है मनुष्य की बुद्धि बाकि पशुओं से कैसे तेज दौड़ी? जुड़वा भाई चिम्पांजी कैसे पीछे रह गया? उसका मानसिक विकास क्यों नहीं मनुष्य जैसा है?

जुड़वाः मानव और चिम्पांजी!

मनुष्य एवरेस्ट पर बैठ दुष्टता, साजिशी प्रवृत्ति में पूरी मानवता, मनुष्य समूहों पर, पृथ्वी पर प्रभुत्व की प्रकृति में दिमाग खपाए हुए है वहीं चिम्पांजी सुबह-शाम कंदमूल की जीवनचर्या से अपने अस्तित्व को भ

और लोड करें