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पत्रकारिता का 25 साल का सफर सिर्फ पढ़ने और लिखने में गुजरा। खबर के हर माध्यम का अनुभव। ‘जनसत्ता’ में प्रशिक्षु पत्रकार से शुरू करके श्री हरिशंकर व्यास के संसर्ग में उनके हर प्रयोग का साक्षी। हिंदी की पहली कंप्यूटर पत्रिका ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, टीवी के पहले आर्थिक कार्यक्रम ‘कारोबारनामा’, हिंदी के बहुभाषी पोर्टल ‘नेटजाल डॉटकॉम’, ईटीवी के ‘सेंट्रल हॉल’ और अब ‘नया इंडिया’ के साथ। बीच में थोड़े समय ‘दैनिक भास्कर’ में सहायक संपादक और हिंदी चैनल ‘इंडिया न्यूज’ शुरू करने वाली टीम में सहभागी।
खाद्य सुरक्षा बनाम किसान का हित

निर्यात पर पाबंदी का फैसला देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिहाज से किया गया एक अच्छा फैसला है लेकिन क्या यह फैसला किसानों को नुकसान पहुंचाने वाला है?

सबको पसंद है राजद्रोह कानून

किसी को आतंकवादी या नक्सलवादी बताने से ज्यादा मुफीद देशद्रोही या राजद्रोही बताना होता है। देशद्रोह या राजद्रोह का मुकदमा होने से लोगों की छवि को ज्यादा नुकसान होता है।

श्रीलंका संकट का सबक

भारत में भी महानायक नेता के हाथ में कमान है और भारत में भी आंदोलनों को विपक्ष की साजिश बताया जाता है। इस तरह श्रीलंका के संकट का भारत के लिए बड़ा सबक है।

सोनिया की अपील कौन सुन रहा है?

कांग्रेस अध्यक्ष को इन नेताओं से कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए। अगर वे सोच रही हैं कि पार्टी का कर्ज चुकाने की मार्मिक अपील का कोई असर नेताओं पर होगा तो वे गलतफहमी में हैं।

कश्मीर से अखिल भारतीय राजनीति

जम्मू कश्मीर में विधानसभा और लोकसभा सीटों के परिसीमन के लिए बनी जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले आयोग ने जब से अपनी रिपोर्ट दी है तब से राज्य की राजनीति पर इसके असर को लेकर बहुत चर्चा हो रह

पुलिस क्या राज्यों की राजनीतिक सेना है?

दिल्ली के एक भाजपा नेता और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट तेजिंदर बग्गा की गिरफ्तारी को लेकर तीन राज्यों की पुलिस के बीच जो ड्रामा हुआ वह एक बेहद गंभीर बीमारी का बड़ा और प्रत्यक्ष लक्षण है।

कैसे हो ‘मेक इन इंडिया’ संभव?

सवाल है कि क्या यह मान लिया जाए ‘मेक इन इंडिया’ योजना भारत में सफल ही नहीं हो सकती है?

तपती धरती का जिम्मेदार कौन?

भारत को इस मामले में पहल करनी चाहिए और दूसरे देशों को साथ लेकर ग्रीन हाउस गैसों के अत्यधिक उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार देशों को सुधार के लिए बाध्य करना चाहिए।

धार्मिक-सामाजिक एजेंडे का क्या जवाब?

भाजपा अब ऐसा एजेंडा सेट कर रही है, जिस पर कोई भी प्रतिक्रिया देना विपक्ष के लिए राजनीतिक रूप से आत्मघाती हो सकता है।

कार्यपालिका और न्यायपालिका साथ-साथ!

अच्छा लगा कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के शीर्ष लोग एक साथ बैठे और न्याय प्रक्रिया की मौजूदा स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

रोजगार सबसे बड़ा संकट

महंगाई एक बड़ी समस्या है, जिससे इस समय पूरा देश जूझ रहा है। सांप्रदायिक हिंसा और समाज में जहर घोलने वाली घटनाएं भी कम चिंता की बात नहीं हैं।

राज्यों के लिए टैक्स घटाना आसान नहीं

टैक्स कम करने वाले राज्यों में भी पेट्रोल पर 25 फीसदी से ज्यादा टैक्स लेने वाले सात में से पांच राज्य भाजपा शासित हैं और डीजल पर सबसे ज्यादा टैक्स वसूलने वाले तीन राज्यों में से एक भाजपा शासित है।

झूठी उम्मीदों और मतिभ्रम का शिकार कांग्रेस

कांग्रेस पार्टी के नेता झूठी उम्मीदों के सहारे जी रहे हैं। पहली बार चुनाव हार कर 44 सीटों पर आने के बाद कांग्रेस के नेता कह रहे थे कि अब इससे नीचे क्या जाएंगे।

अभिव्यक्ति पर चौतरफा खतरा

लोकतंत्र को कमजोर करने या खत्म कर देने के वैसे तो कई तरीके हैं लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से इसे कमजोर करना अब तक सबसे प्रभावी साबित हुआ है।

राज्यपालों का काम फैसले रोकना नहीं

यह सिर्फ एक प्रशासनिक मामला नहीं है कि राज्यपाल कोई प्रस्ताव रोक दें या सरकार के कामकाज पर टिप्पणी करें, बल्कि यह लोकतंत्र की बुनियादी धारणा को चुनौती है।

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