अमरेंद्र की बट्टी, गोदी मीडिया का झाग!

मोदी-अमित शाह, भाजपा की आईटी सेल के इस कमाल को मानना होगा जो पंजाब में जीरो हैसियत बनने के बाद भी अमरेंद्र सिंह के हल्ले, झाग को बनवा कर पूरे देश में वापिस चर्चा बनवा डाली ।

राहुल, पीके ने क्या सोचा था ऐसा घटनाक्रम?

हो सकता है प्रशांत किशोर की भागदौड़ का मैं जो अर्थ निकाल रहा हूं वह गलत हो। लेकिन अपना मानना है कि पंजाब में अमरेंद्र सिंह को हटाने के फैसले में प्रशांत किशोर के इनपुट का हाथ था।

नाराज नेताओं के जायज सवाल

सिब्बल ने जो कहा वह सीधे राहुल गांधी और उनकी ऑथोरिटी पर सवाल था। सिब्बल ने जी-23 और जी हुजूर- 23 का जो जुमला बोला वह भी कांग्रेस नेताओं को नागवार गुजरा है।

सिब्बल कब तक अहसान करते रहेंगे?

क्या सचमुच पार्टी ने उनको या जी-23 समूह के नेताओं को अपना नहीं माना? ऐसा नहीं है। जी-23 समूह के लगभग सारे नेता कांग्रेस आलाकमान की कृपा से ही फले फूले हैं।

कांग्रेस में फैसले तो हो रहे हैं

वैसे भी अगले साल होने वाले चुनावों के लिए कांग्रेस ने जरूरी फैसला कर लिए हैं। उत्तर प्रदेश को छोड़ दें तो बाकी राज्यों में कांग्रेस लड़ती दिख रही है।

जिधर सुनो उधर अडानी!

देश का किसान, आम उपभोक्ता, व्यापारी, देश की विदेश नीति, व्यापार नीति हर तरफ अडानी-अडानी के चर्चे! और अब ड्रग्स, हेरोइन के भारत में व्यापार की बातों में भी अडानी का मुंद्रा बदरगाह चर्चाओं में!

जिधर देखो उधर अंबानी

जगत सेठ, मुकेश अंबानी और गौतम अडानी नाम के तीन कुबेर ऐसे इतिहासजन्य हैं, जिनसे हिंदुओं की तकदीर, गुलामी और शोषण का इतिहास रचा या रचता हुआ है।

अंबानी और अडानी : दोनों का डंका एक सा!

दुनिया की राजनीति और कूटनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डंका है तो कारोबार की दुनिया में दो गुजराती कारोबारियों अंबानी और अडानी का डंका बज रहा है।

हकीकत कैसे सामने आएगी?

अगर बंदरगाह पर नशीली दवा पकड़ी गई है तो इसमें बंदरगाह के स्वामित्व वाली कंपनी का क्या कसूर है या इसमें उसकी क्या भूमिका है?

परिवहन पर एकाधिकार के खतरे

भारत में पिछले कुछ बरसों से परिवहन व्यवस्था पर अडानी समूह का एकाधिकार बन रहा है। देश के तमाम बंदरगाह और हवाईअड्डे अडानी समूह के नियंत्रण में जा रहे हैं।

मुंद्रा पोर्ट से भारत में में ‘नारको जिहाद!

‘नारको जिहाद’ के जुमले से सांप्रदायिकता की बू आ रही है तो आप कोई और शीर्षक सोच सकते हैं, जैसे ‘नारको टेरेरिज्म’ या ‘उड़ता हिंदुस्तान’!

गुजरात का जुआ हार वाला!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी जोखिम ली है। अब वे 2022 का गुजरात विधानसभा चुनाव तभी जीत पाएंगे जब कांग्रेस और आप दोनों एक-दूसरे के वोट काटने वाली राजनीति करें।

उद्धव और केजरीवाल की पौ बारह!

गुजरात, कर्नाटक, उत्तराखंड में मुख्यमंत्रियों को ताश के पते की तरह फेंटने से भाजपा के तमाम मुख्यमंत्रियों की इमेज का जैसा भट्ठा बैठा है और कांग्रेस जिस दशा में है

कर्नाटक, उत्तराखंड से अलग गुजरात का प्रयोग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में बहुत जोखिम भरा प्रयोग किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को हटाया तो उनके साथ सारे मंत्रियों को भी हटा दिया। यह कर्नाटक और उत्तराखंड से बिल्कुल अलग प्रयोग है।

क्षत्रपों के लिए राज्यों में मौका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में वह प्रयोग किया है, जिसकी भारत में कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसकी कुछ कुछ कुमारस्वामी कामराज की 1963 की योजना से तुलना की जा सकती है।

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