अमेरिका से है दुनिया का जीना!

क्षण के लिए सोचें अमेरिका यदि रूस हो जाए, चीन हो या भारत बने तो इस…

गर्मी में लगी जो बुरी लत!

मेरा लिखना, पढ़ने की बुरी लत से है! मतलब बचपन की बुरी लत से मैं बना…

छोटी बातों का यादगार वक्त

यदि इंसान के वश में वक्त विशेष को लौटाना, उसमें दोबारा जीना संभव होता तो वह…

खूंटे, रिश्ते और आजादी

‘मैं’, ‘मैं’ हूं! ‘मैं’ अकेला! खाली हाथ आए थे खाली हाथ जाएंगे। लेकिन जिंदगी तो प्राप्त…

महानगर से गांवों तक मानवीय आपदा

कोरोना वायरस एक बीमारी है पर भारत में यह एक विशाल मानवीय आपदा में बदल गई…

गुजरातियों ने क्या पाप किया?

पता नहीं गुजरातियों को किन पापों का नतीजा भुगतना पड़ रहा है? भला गुजरातियों ने ऐसा…

वायरस और भूख का कुंआ

भारतीय रेलवे, रेलवे बोर्ड जब किराया लेकर लोगों को दो वक्त खाने के पैकेट नहीं बांट…

वायरस+मानवीय संकट= मौत का कुंआ

हां, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लीगल ब्रेन तुषार मेहता व उन जैसी सोच…

ट्रेन से यात्रा भी मानवीय आपदा है

मजदूरों का पलायन या विस्थापन शुरू होने के दो महीने बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे…

‘मां’ और मन्नत

मेरा अपनी जिया (मां) से अनुभव है कि मां ताउम्र भगवानजी से प्रार्थना करते हुए जिंदगी…

पिता की स्मृति में एक पिता

जिंदगी को लिखना कहानी के आधे-अधूरेपन में भटकना है! कहानी का जन्म और उसकी परवरिश माता-पिता…

‘न्यू इंडिया’ में देखिए जानवर (लोग)

आप यदि इंसान हैं व मानवीय चेतना लिए हुए हैं तो क्या आप भारत का जानवर…