व्यूज़- विचार
लेख-स्तंभ
भ्रष्टाचार मुक्त कुछ भी नहीं!
भारत में क्या कोई भी सरकारी खरीद भ्रष्टाचार के बगैर हो सकती...
एसआईआर में फिर वही कहानी
पंजाब के गुरदासपुर में काहनूवान इलाके के भट्टियां गांव के गुरप्रीत सिंह...
राम मंदिर का कलंक
यह मंदिर ही नहीं, सत्ता भी चलाने की अयोग्यता का अधिक बड़ा...
विपक्षी सरकारें असुरक्षित क्यों हैं?
अभी यह सवाल इसलिए है क्योंकि कम से कम तीन राज्य सरकारों...
नादब्रह्म की कल्पना और संगीत की उत्पत्ति
भारतीय परंपरा में संगीत केवल मनोरंजन का साधन अथवा भौतिक कला मात्र...
परिवारों में सोचा जाए डिजिटल डिटॉक्स
हर समय नोटिफिकेशन्स, लाइक्स और कमेंट्स आदि की तलाश में हमारा मस्तिष्क...
युद्ध केवल ठहरते हैं, अब खत्म नहीं होते!
नेताओं की लोकलुभावन राजनीति की एक विचित्र विशेषता है। ऐसे नेता कभी...
बढ़ रही है बंगाल की भूमिका
चार मई को आए चुनाव नतीजे और उसके बाद के घटनाक्रम ने...
हरिशंकर व्यास लेख
सपनों को गाते-गाते बना अमेरिका
अमेरिका ढाई सौ वर्ष का हुआ। इस शुक्रवार-शनिवार उसके जश्न की कुछ...
आज के कैसे ये दो भारत?
मैंने वह समय देखा है जब चौधरी चरण सिंह ने ‘असली भारत’...
वीबी जी रामजी के नाम पर
हिसाब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मनरेगा योजना खत्म करनी थी। प्रधानमंत्री...
असली भारत का कैसे पता चलेगा?
भारत के एक स्टैंड अप कॉमेडियन हैं वीर दास। वीर दास ने...
दो भारत में मंदिर के दो तरह से दर्शन!
हां, देश के अंदर व्यवस्थित तरीके से दो देश बनाए गए हैं।...
उत्तर और दक्षिण का भारत
भारत के अंदर दो भारत की बात करें तो आर्थिक व सामाजिक...
असली सरोकार और चुनावी प्राथमिकता
देश के नागरिकों के असली सरोकार अलग हैं और उनकी राजनीतिक चिंताएं...
सुरक्षा का असली मुद्दा बनाम पाकिस्तान
भारत में हर चीज कैसे असली और नकली में विभाजित है या...
श्रुति व्यास
युद्ध केवल ठहरते हैं, अब खत्म नहीं होते!
नेताओं की लोकलुभावन राजनीति की एक विचित्र विशेषता है। ऐसे नेता कभी...
राजनीति अब केवल अवसरवाद
अब भारत की राजनीति में धारा दक्षिणपंथ या धर्मनिरपेक्षता या वामपंथ की...
मैं, आप कौन? कहां के नागरिक?
“मैं आखिर हूँ कौन?” यह सवाल बिना बुलाए आता है। कभी बीस...
रूस–यूक्रेन युद्ध 1,566 दिनों पार, दुनिया युद्ध खत्म कराना भूल गई!
यूक्रेन का युद्ध अब पहले महायु्द्ध से लंबा हो चुका है। यह...
देश जिसे विरोध करना भुला दिया गया
छह जून की सुबह जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी की एक मामूली-सी...
बारह साल का मेकअप, पर नया क्या?
भारत बदल गया है। कम से कम पिछले बारह वर्षों से यही...
केकड़े लड़ रहे हैं, पानी सूख रहा है हर कोई दोषी है, कोई दोषी नहीं।
भारत मानो एक अघोषित गृहयुद्ध में है। केकड़ों वाली पुरानी कहावत अब...
मैं दिल्ली, हर चीज़ से पहले यहाँ थी!
मुझे हमेशा मेरे लोगों ने बनाया। वे लोग जो बाहर से आए,...