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लगभग 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय।खेल भारती,स्पोर्ट्सवीक और स्पोर्ट्स वर्ल्ड, फिर जम्मू-कश्मीर के प्रमुख अंग्रेज़ी अख़बार ‘कश्मीर टाईम्स’, और ‘जनसत्ता’ के लिए लंबे समय तक जम्मू-कश्मीर को कवर किया।लगभग दस वर्षों तक जम्मू के सांध्य दैनिक ‘व्यूज़ टुडे’ का संपादन भी किया।आजकल ‘नया इंडिया’ सहित कुछ प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं के लिए लिख रहा हूँ।
  • लाल सिंह से कांग्रेस को जम्मू में संजीवनी

    लाल सिंह की कांग्रेस में वापसी जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। चौधरी लाल सिंह की भाषण शैली, हाज़िरजवाबी, समाज के लगभग सभी वर्गों के साथ संपर्क भी उन्हें अपने प्रतिद्वंद्वी पर भारी साबित करती है। विशेषकर जम्मू संभाग में चौधरी लाल सिंह की पहचान एक जुझारू व जमीनी नेता के रूप में रही है। उल्लेखनीय है कि इस बार भी उधमपुर सीट पर चौधरी लाल सिंह का सामना दो बार के सांसद व केंद्र में मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह के साथ ही होगा। jammu kashmir lal singh congress जिस कांग्रेस को पंद्रह दिन पहले तक...

  • साल भर में ही अकेले, अलग-थलग आज़ाद

    किसी समय देश की राजनीति में बेहद ताकतवर माने जाने वाले गुलाम नबी आज़ाद एक ही वर्ष में गुमनामी में खोने लगे हैं।... आज़ाद कभी भी ताकतवर ज़मीनी नेता नही थे। लगातार दिल्ली में सत्ता में रहने के कारण ताकतवर नेता का लबादा तो उन्होंने ओढ़े रखा था मगर वास्तविकता में ज़मीनी राजनीति से उनका कभी भी कोई लेना-देना नहीं रहा। गलती कांग्रेस की भी रही है कि उसने खुद आज़ाद का कद इतना बड़ा बना दिया था कि एक समय दिल्ली में यह भ्रम सभी को हो चुका था कि आज़ाद बहुत ही ताकतवर नेता हैं।...बड़े-बड़े बुद्धिजीवियों व पत्रकारों,...

  • आज़ाद के दावों का सच

    या तो आज़ाद इतिहास भूल गए हैं या जानबूझकर ऐसी बातें लिख-बोल रहे हैं ताकि कुछ दिन सनसनी बनी रहे और वे राजनीतिक रूप से प्रासंगिक भी बने रहें। मगर आज़ाद कुछ भी कहें एक बात साफ है कि उनके बयान और किताब में छपे उनके कुछ दावे बेहद हास्यास्पद हैं। राजनीति में सफलता की ऊंचाईयां छू चुके आज़ाद आखिर क्यों ऐसा साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके साथ हर जगह अन्याय हुआ है ? कांग्रेस छोड़ कर अपने लिए राजनीतिक ज़मीन तलाश रहे गुलाम नबी आज़ाद इन दिनों अपनी किताब और हाल ही में दिए गए...