केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने राज्यसभा की चार सीटों के लिए चार सदस्यों को मनोनीत किया है। हर बार की तरह इस बार भी नाम चौंकाने वाले हैं लेकिन इसमें कोई संदेह नही है कि चुनाव को ध्यान में रख कर नाम तय किए गए हैं। कम से कम दो नाम तो ऐसे हैं, जो विशुद्ध रूप से चुनावी राजनीति में फिट बैठते हैं। एक नाम है कि महाराष्ट्र के वकील उज्ज्वल निकम का और दूसरा है केरल के भाजपा नेता सी सदानंदन मास्टर का। इनके अलावा दो नामों में एक इतिहासकारर मीनाक्षी जैन हैं और दूसरे विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी हर्षवर्धन शृंगला है। मीनाक्षी जैन देश के जाने माने पत्रकार और संपादक गिरिलाल जैन की बेटी हैं और वरिष्ठ पत्रकार सुनील जैन की बहन हैं।
बहरहाल, केरल में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। उससे पहले भाजपा अपने पत्ते बिछा रही है। राजीव चंद्रशेखर प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए हैं लेकिन तिरूवनंतपुरम सीट पऱ उनको हराने वाले कांग्रेस के नेता शशि थरूर को भी भाजपा साथ लाने के प्रयास में लगी है। इस बीच भाजपा के पुराने नेता सी सदानंदन मास्टर को राज्यसभा भेजने का फैसला किया गया है। वे बरसों से भाजपा के साथ हैं और कम्युनिस्ट विचारधारा से लड़ते रहे हैं। 1994 में सीपीएम कार्यकर्ताओं के संदिग्ध हमले में उन्होंने अपने दोनों पैर गंवा दिए। उनको जिंदा शहीद कहा जाता है। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनको उम्मीदवार बनाया था लेकिन वे जीत नहीं सके। अब वे राज्यसभा जाएंगे।
उधर महाराष्ट्र में मुंबई सहित कई शहरों में स्थानीय निकायों के चुनाव होने वाले हैं। इनमें मुंबई का चुनाव सबसे अहम है। इसे ध्यान में रखते हुए उज्ज्वल निकम को राज्यसभा भेजने का फैसला हुआ है। निकम ने मुंबई पर हुए आतंकी हमले का मुकदमा लड़ा था। जिंदा पकड़े गए एकमात्र आतंकवादी अजमल कसाब को फांसी तक पहुंचाने में उनका बड़ा हाथ था। उन्होंने ही जेल में कसाब को बिरयानी खिलाए जाने का झूठा प्रचार किया था, जिससे तब की कांग्रेस सरकार कठघरे में आई थी। बाद में उन्होंने खुद ही कहा कि कसाब को बिरयानी खिलाने वाली कहानी उन्होंने खुद गढ़ी थी। इस योग्यता को देखते हुए भाजपा ने उनको 2024 में मुंबई नॉर्थ सेंट्रल सीट से उम्मीदवार बनाया था लेकिन वे चुनाव हार गए थे। इस तरह विधानसभा और लोकसभा हारने वाले दो लोगों को सरकार ने राज्यसभा में मनोनीत किया है।
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