रूस हितैषी ट्रंप आखिर क्या चाह रहे?
किसने कल्पना की थी एक दिन ऐसा भी आएगा जब रूस को अमेरिका दुश्मन की तरह देखना बंद करेगा? इतना ही नहीं वह यूक्रेन मसले पर स...
किसने कल्पना की थी एक दिन ऐसा भी आएगा जब रूस को अमेरिका दुश्मन की तरह देखना बंद करेगा? इतना ही नहीं वह यूक्रेन मसले पर स...
कौन सोच सकता था कि पश्चिमी दुनिया की उन राजधानियों में लोकतंत्र लुढकेगा जिन्होंने कभी इसके धर्मग्रंथ लिखे थे! मगर आज यह...
कौन सोच सकता था कि “नियम-आधारित व्यवस्था” का अपने को संरक्षक बताने वाला अमेरिका एक दिन दुनिया में अछूत बनने की और होगा? ...
कभी समय था जब सियासी असहमति का मतलब बहसबाजी थी। तथ्य तौलने के लिए रखे जाते थे। तब तर्कों की कसौटी होती थी, और गर्मागर्म ...
भारत इन दिनों अलग ही तरह के नए जनवाद की लहर पर सवार है। हर चुनाव इस ज्वार को और ऊँचा कर देता है। लहर अब इतनी प्रबल है कि...
कितना हैरानी भरा है यह! आप चाहें तो सिर पकड़ लें, मन टूटता महसूस करें, चिंता में घुल जाएँ, पर सच दो टूक, अडिग खड़ा है। फिर...
कांग्रेस को अब आत्ममंथन की ज़रूरत नहीं है बल्कि कायाकल्प याकि राजनीतिक पुनर्जन्म, या फिर एक शांत, गरिमापूर्ण राजनैतिक मौ...
एक समय था जब फॉलोअर्स की संख्या से क़ीमत तय होती थी। जिसके ज़्यादा अनुयायी, वही असरदार, वही ‘प्रासंगिक’। मतलब भीड़ का आक...
और इसलिए नहीं क्योंकि हम एक संतुष्ट, आत्मसंतोषी देश बन चुके हैं बल्कि इसलिए कि हम विरोध करना ही भूल गए हैं।पिछले एक हफ़्...
सत्ता, एक बार मिल जाए तो छूटती नहीं। वह धीरे-धीरे रगों में आदत बनकर उतर जाती है, और फिर वही मृगतृष्णा बनी हुई होती! ...
बिहार को मैं दूर से देख रही हूँ! कुछ वैसे ही जैसे एक ही सूरज ढलते हुए हर बार कुछ अलग लगता है, फिर भी हर बार वैसा ही। रिप...
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे तीस साल बाद फिर से परमाणु परीक्षण शुरू करेंगे। उधर पाकिस्तान ने धमकी दी है कि तालिबान को फ...
क्या जलवायु चिंता से शुरू कोप (COP) सम्मेलन कुछ मायने रखता हैं? या सिर्फ बस एक नौटंकी है? यह प्रश्न अब स्थाई है पर बे...
हर साल, घड़ी की तरह, हंगामा फिर शुरू है। दीया बुझा भी नहीं होता कि नसीहत, प्रवचन बरसने लगे हैं। हवा के प्रदूषण के एक्यूआ...
हम ऐसे समय में जी रहे हैं जब संस्थाएँ और गठबंधन, जो कभी सामूहिक इच्छा के प्रतीक थे, अपना अर्थ अब खोते हुए हैं। जैसे संयु...