राजनीति अब केवल अवसरवाद
अब भारत की राजनीति में धारा दक्षिणपंथ या धर्मनिरपेक्षता या वामपंथ की नहीं है। न ही हिंदुत्व की है।
अब भारत की राजनीति में धारा दक्षिणपंथ या धर्मनिरपेक्षता या वामपंथ की नहीं है। न ही हिंदुत्व की है।
“मैं आखिर हूँ कौन?” यह सवाल बिना बुलाए आता है। कभी बीस साल की उम्र में, जब दुनिया आपसे निश्चित उत्तर चाहती है मगर आपक...
यूक्रेन का युद्ध अब पहले महायु्द्ध से लंबा हो चुका है। यह तुलना केवल दिनों की संख्या के कारण चौंकाने वाली नहीं है। प्रथम...
छह जून की सुबह जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी की एक मामूली-सी भीड़ जमा हुई। इसकी मांग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की थी। य...
भारत बदल गया है। कम से कम पिछले बारह वर्षों से यही कथा सुनाई जा रही है। बदलाव भी बड़े पैमाने पर, तेज़ी से और लगभग हर दिन...
भारत मानो एक अघोषित गृहयुद्ध में है। केकड़ों वाली पुरानी कहावत अब छोटी पड़ गई है। उस प्रवृत्ति से आगे निकल गए हैं जहाँ क...
मुझे हमेशा मेरे लोगों ने बनाया। वे लोग जो बाहर से आए, जिन्होंने मुझे अपनाया और ऐसा करके मुझे बन...
कॉकरोच अब राष्ट्रीय बहस है। किसने सोचा था कि एक बात भारत का वैश्विक हल्ला बनाने वाली होगी? चीफ जस्टिस की टिप्पणी के बाद ...
सन् 1985 में नील पोस्टमैन ने “हँसते-हँसते विनाश की ओर” (Amusing Ourselves to Death) किताब लिखी थी। उसमें आधुनिक सभ्यता क...
इस मई बीजिंग में दिलचस्प दृश्य, नजारा है। डोनाल्ड ट्रंप का ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में स्वागत हुआ। उन्होंने 21 तोपों की सल...
कुछ दिन पहले यह जानकर एक अजीब-सी संतुष्टि हुई कि भारत भी ब्रिटिश नागरिकों के वीज़ा खारिज करता है। डिनर टेबल पर यही चर्चा...
आज बीजिंग में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आमने-सामने बैठे हैं। यह केवल एक कूटनीत...
2026 गर्मियों का नया अहसास लिए हुए है। न केवल मौसम बदला हुआ है, बल्कि गर्मियों की छुट्टियों का बोझ भी बढ़ा हुआ है। मौसम ...
तो अब जनता के लिए संयम का समय है। 10 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुपचाप परदा हटा दिया। असलियत सामने आई। देशवासियो...
ताजा चुनाव नें क्षेत्रीय दलों का भविष्य दिखला दिया है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की करारी हार, तमिलनाडु में स्टालिन क...