सर्द मौसम में गरमाती सियासत

अब जबकि धीरे-धीरे प्रदेश के वातावरण में ठंडक बढ़ने लगी है तब प्रदेश की सियासत गरमाने लगी है।

मप्र मिशन 2023: विधायकों की कसरत

प्रदेश के दोनों ही प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस 2023 के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते इसके लिए अभी से तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

मप्र: पंचायत चुनाव में अभी और भी है पचड़े

सरकार की तैयारियों को देखकर माना यही जा रहा है कि दिसंबर माह में त्रिस्तरीय पंचायती राज के चुनाव हो जाएंगे लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष की आरक्षण परिसीमन को लेकर लाए गए

फीडबैक से उपजेगे फासले दूर करने के उपाय

दरअसल शून्य से शिखर तक पहुंची भारतीय जनता पार्टी का कारण यही है कि वह लगातार समीक्षा बैठक करती रहती है जिसके माध्यम से कमजोर कड़ियों को दूर करने की कोशिश होती रहती है

कमबैक करने कमर कसते दल

प्रदेश में मिशन 2023 के लिए दोनों ही प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा जहां 2018 जैसी कोई चूक नहीं करना चाहती है।

अफसरों के तबादलों की आहट

प्रदेश में संभावित त्रिस्तरीय पंचायती राज और नगरी निकाय के चुनावों को देखते हुए प्रशासनिक फेरबदल की आहट सुनाई देने लगी है।

शून्य से शिखर तक आदिवासी आगाज

पूरे देश में आदिवासी वर्ग को आकर्षित करने के लिए गांव से लेकर दिल्ली तक राजनीति का आगाज हो चुका है अब प्रदेश में मिशन 2023 तक और देश में मिशन 2024 तक राजनीतिक दलों की आवाज में आदिवासी ही सुनाई देगा।

दलों को दम दिखा कर हासिल की गौरवशाली परंपरा

दरअसल, आदिवासियों के समान या इससे ज्यादा और भी जातियां होंगी लेकिन वे अब तक राजनीतिक दलों को अपनी ताकत का एहसास नहीं करा पाई है।

आवभगत से अचंभित आदिवासी

दरअसल, प्रदेश और देश की राजनीति में कब कौन केंद्र में आ जाए कुछ कहा नहीं जा सकता जैसा कि इस समय प्रदेश और देश की राजनीति का फोकस आदिवासी वर्ग पर बना हुआ है।

आदिवासियों को रिझाने में लगे भाजपा और कांग्रेस

प्रदेश में इस समय आदिवासी समाज राजनीतिक दलों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है 15 नवंबर को राजधानी भोपाल में जहां भाजपा जनजाति गौरव दिवस मना रही है।

कांग्रेस तोड़ो अभियान पर भाजपा

प्रदेश में दो दलीय राजनैतिक वातावरण होने के कारण भाजपा से नाराज लोग कांग्रेस और कांग्रेस से नाराज लोग भाजपा के साथ हो जाते हैं और थोड़ी सी चूक हो जाने पर सत्ता परिवर्तन हो जाता है।

सम्मान और सुविधाओं के लिए पूर्व विधायक संगठित

पूर्व विधायकों को अपने सम्मान और सुविधाओं के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होना पड़ा है।

मिशन 2023 के लिए जलने लगे उम्मीदों के दिये

पार्टी के बाहर दोनों ही दलों के नेता इन परिणामों की व्याख्या कुछ इस तरह से कर रहे हैं जिससे उनका ही पक्ष मजबूत दिखाई दे रहा है।

कमजोर कड़ी तलाशने कांग्रेस की कमेटी

दरअसल, प्रदेश में संपन्न हुए एक लोकसभा और 3 विधानसभा उपचुनाव के सियासी मायने विधानसभा के 2023 में होने वाले आम चुनाव के लिए वातावरण बनाने को लेकर है।

उपचुनाव बचाने की बजाय छीनने पर जोर

पिछले एक महीने से प्रदेश में खंडवा लोक सभा रैगांव जोबट पृथ्वीपुर विधानसभा के उपचुनाव के लिए घमासान मचा हुआ था 30 अक्टूबर के मतदान के बाद भी अटकलों का दौर जारी है

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