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Friday, May 14, 2021
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देवदत्त दुबे

अब आपातकाल पर बयानों की आफत

दरअसल, राजनीति में कब क्या बोलना है इसका बहुत महत्व है। कांग्रेस के एक नेता के बयान ने रातों रात गुजरात विधानसभा का चुनाव परिणाम काफी प्रभावित कर दिया था और भी ऐसे अनेकों उदाहरण है

उम्मीदों से लैस पेपर लैस बजट

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के चौथे कार्यकाल में कोरोना के कारण पहला पेपरलेस एवं पूर्ण बजट पेश किया गया जिसमें उम्मीदें दिखाई गई है। विपरीत परिस्थितियों के चलते उम्मीदें पूरी करना किसी चुनौती से कम नहीं है।

स्थगन भी सदन में कांग्रेस की धमक नहीं बना पाया

वहीं स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए परिवहन मंत्री गोविंद राजपूत ने तथ्यों तर्को और दुर्घटना के मानवीय पक्षों को इतने प्रभावी ढंग से रखा की की आखिर में विपक्षी सदस्यों

शिवराज ने हीरे गिनाए कमलनाथ ने मांगी साइकिल

दरअसल, कितना भी गंभीर मामला हो लेकिन सदन में हास - परिहास के दौर हो ही जाते हैं शेरो-शायरी कहने में भी कभी-कभी होड़ सी लग जाती है। ऐसा ही कुछ नजारा शुक्रवार को विधानसभा का था

माफिया पर गर्माया सदन का माहौल

अवैध रेत और खनन माफिया पर दागे सवालों से सदन का माहौल गुरुवार को गरमाया रहा। नौबत यहां तक आई कि अध्यक्ष को कहना पड़ा ऐसे शब्द ना बोलें जिसे विलोपित करना पड़े।

सदन में सामना और सहमति के प्रयास

दरअसल, सदन के अंदर सरकार को घेरने के लिए विपक्ष को अच्छा अवसर माना जाता है। वहीं सरकार के लिए अपनी उपलब्धियों का बखान करने का भी बेहतर मंच माना जाता है।

संक्रमण और चुनाव प्रचार ने पकड़ी रफ्तार

जहां कोरोना का संक्रमण रफ्तार पकड़ता जा रहा है वहीं चुनाव प्रचार को गति देने में भी दोनों दलों के प्रमुख नेता चुनावी अखाड़े में कूद चुके हैं। दुविधा और द्वंद दोनों में है। कोरोना का इलाज भी

धड़काने बढ़ाने वाले उपचुनाव की तैयारियां हुई तेज

दरअसल, इधर गणेश जी की विदाई हुई है, उधर चुनावी तैयारियों का श्री गणेश हो रहा है। प्रदेश के दोनों ही प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस के नेताओं को हर हाल में इन चुनावों में जीत चाहिए।

प्रकृति हमें देती है सब कुछ… हम भी तो कुछ देना सीखें

पिछले कुछ महीनों से कोरोना महामारी के कारण मानव जाति परेशान हैं। अर्थव्यवस्था की हालत पस्त हो गई है। व्यापार, व्यवसाय और नौकरियों पर भी आफत आई हुई है लेकिन इसी दौरान प्रकृति ने राहत की सांस ली है।

विद्रोह की चिंगारी मध्यप्रदेश में भी

दरअसल, कांग्रेस पार्टी में इस समय लेटर बम से उठा तूफान अभी शांत होता दिखाई नहीं दे रहा है। चिट्ठी लिखने के कारण और मीडिया में यह कैसे लीक हुआ इसका पता लगाने के लिए अंदरूनी तरीके से जांच शुरू हो गई है।

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